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धनबाद के सिंफर में महिला वैज्ञानिक की नई पहल: नई तकनीक से कचरे से बनेगी ऊर्जा और कम होगा प्रदूषण

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द फॉलोअप डेस्क
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश-विदेश की महिला वैज्ञानिक विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल पेश कर रही हैं। इस बीच धनबाद स्थित कोयला अनुसंधान संस्थान सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (CIMFR) यानी सिंफर की प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. वी. एंगुसेल्वी ऐसी तकनीकों पर काम कर रही हैं, जो कचरे से ऊर्जा बनाने के साथ-साथ प्रदूषण को कम करने में भी मददगार साबित हो सकती है।
डॉ. एंगुसेल्वी का प्रमुख शोध बायो-माइनिंग तकनीक पर केंद्रित है। यह एक पर्यावरण अनुकूल प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से खनन अपशिष्ट और कम ग्रेड के अयस्क से रेयर अर्थ एलिमेंट्स और अन्य खनिजों की रिकवरी की जा सकती है। इस प्रक्रिया में फंगस, बैक्टीरिया, एल्गी और पौधों जैसे सूक्ष्मजीवों की मदद ली जाती है, जो अपनी जैविक क्रियाओं के जरिए खनिजों को घोलकर उपयोगी धातु तत्वों को अलग करने में सहायक होते हैं। पारंपरिक खनन तकनीकों की तुलना में यह तरीका कम लागत वाला और पर्यावरण के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।

इसके साथ ही वह कचरे से बायो-सीएनजी उत्पादन की तकनीक पर भी शोध कर रही हैं। बायो-सीएनजी एक स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन है, जिसे भोजन के कचरे, नगर निगम के ठोस कचरे और कृषि अवशेष से बनने वाली बायोगैस को शुद्ध करके तैयार किया जाता है। शुद्धिकरण के बाद इसमें 90 से 95 प्रतिशत तक मीथेन होती है, जिससे यह उच्च ऊर्जा क्षमता वाला ईंधन बन जाता है। इससे एक ओर कचरे के प्रबंधन में मदद मिलती है, तो दूसरी ओर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी संभव होता है। डॉ. एंगुसेल्वी “स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री” (SALT) नामक एक नई तकनीक पर भी काम कर रही हैं। यह एल्गी आधारित कृत्रिम पेड़ है, जो हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध करने में मदद करता है। इस प्रणाली को इनडोर और आउटडोर दोनों जगह स्थापित किया जा सकता है और यह सौर ऊर्जा या बिजली से संचालित होती है।

इसमें लगे सेंसर हवा की गुणवत्ता और कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर की निगरानी भी करते हैं। बताया जा रहा है कि इस तकनीक का प्रयोग कोयला खनन क्षेत्र सिंगरौली में भी किया जा रहा है, जहां इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। एल्गी आधारित इस तकनीक से भविष्य में कई उपयोगी उत्पाद तैयार करने की संभावना भी है। वैज्ञानिक एल्गी से विशेष प्रकार के अग्निरोधी कपड़े बनाने पर भी शोध कर रहे हैं, जो भविष्य में अग्निशमन विभाग के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

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