द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा जिले में एलपीजी गैस की भारी किल्लत का सीधा असर अब स्कूली बच्चों के निवाले पर पड़ने लगा है। जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, हरिजन विद्यालय और कई उत्क्रमित मध्य विद्यालयों में मिड डे मील योजना गैस की किल्लत के कारण डगमगा रही है। जिले के अधिकांश कस्तूरबा विद्यालयों में गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रबंधन अब पारंपरिक संसाधनों की ओर लौटने को मजबूर है। स्थिति यह है कि धुआं रहित रसोई का सपना अब धुएं में गुम होता दिख रहा है; विद्यालय प्रबंधक कोयला या लकड़ी के जुगाड़ से किसी तरह बच्चों के लिए खाना तैयार करवा रहे हैं।
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विडंबना यह है कि जिन शिक्षकों के कंधों पर बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वे अपना शिक्षण कार्य छोड़कर गैस की लंबी लाइनों में खड़े रहने को मजबूर हैं। गोपालपुर उत्क्रमित उच्च विद्यालय के अध्यक्ष परेश राय ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि बड़ी मशक्कत के बाद दो दिन पहले एक सिलेंडर मिला था, जो अब खत्म होने वाला है। उन्होंने कहा कि यदि आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो मिड डे मील का संचालन पूरी तरह बंद करना पड़ेगा।

वहीं बुधुड़ीह स्थित इंडियन गैस गोदाम की तस्वीरें जिले की बदहाली बयां कर रही हैं। शुक्रवार सुबह से ही गोदाम के बाहर 100 मीटर लंबी कतार देखी गईं। हरी प्रसाद राम नामक शिक्षक जो सुबह 7:30 बजे से लाइन में लगे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें मिड डे मील के लिए तीन सिलेंडर चाहिए, पर भीड़ और कमी ने मुश्किल खड़ी कर दी है। वहीं लाइन में खाद एक उपभोगता ने बताया कि लोग सुबह 6 बजे से ही लाइन लगा लेते हैं, फिर भी सिलेंडर मिलना नसीब की बात है। गैस आपूर्ति की कमी ने न केवल आम जनता को परेशान किया है, बल्कि सरकारी योजनाओं को भी अधर में लटका दिया है। यदि समय रहते आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो जामताड़ा के स्कूलों में चूल्हे ठंडे पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर बच्चों की उपस्थिति और उनके स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
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