द फॉलोअप डेस्क
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जीवनी पर फिल्म बननी शुरू हो गई है। बताते चलें कि, दिशोम गुरू महाजनी प्रथा और सूदखोरों के खिलाफ झारखंड आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी। इस कड़ी में झारखंड के पर्यटन एवं खेल मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू धनबाद के राजगंज प्रखंड स्थित लाठाटांड़ गांव पहुंचे और शंकर किशोर महतो से मुलाकात की। जिन्होंने झारखंड आंदोलन में गुरुजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी। मंत्री के आगमन पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने शंकर किशोर महतो को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया और भगवान बिरसा मुंडा की तस्वीर देकर शिष्टाचार भेंट की। इसके बाद शंकर किशोर महतो से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने झारखंड आंदोलन के दिनों की चर्चा करते हुए उनके संघर्ष से जुड़े अनुभवों के बारे में जानकारी ली।

इस पर शंकर किशोर महतो ने अपने उस समय के अनुभवों को मंत्री जी से साझा किया और बताया कि वे विनोद बिहारी महतो के माध्यम से झारखंड आंदोलन से जुड़े थे। आगे उन्होंने कहा कि आंदोलन के शुरुआती दौर में कई बार कार्यकर्ताओं को भारी कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता था। कई बार साथियों को जेल से छुड़ाने के लिए आर्थिक सहयोग तक जुटाना पड़ता था। झारखंड आंदोलन के दिनों को याद करते हुए शंकर किशोर महतो ने बताया कि उस समय टुंडी विधानसभा क्षेत्र के पलमा में उनके घर से संगठन का संचालन किया जाता था। बाद में पोखरिया में आश्रम बना, जहां से झारखंड आंदोलन की गतिविधियां संचालित होने लगीं। शिवाजी समाज के माध्यम से आंदोलन को गति मिली, जिससे गुरुजी शिबू सोरेन जुड़े हुए थे।

वहीं, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन और संघर्ष पर आधारित लगभग तीन घंटे की एक फीचर फिल्म बनने वाली है। जिसे लेकर गहन शोध कार्य चल रहा है। हालांकि, मंत्री ने कहा कि शिबू सोरेन के संघर्षकाल के साथी अब बहुत कम जीवित हैं और उनकी संख्या सीमित है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिबू सोरेन पर बनने वाली फिल्म पूरी तरह वास्तविक घटनाओं और तथ्यों पर आधारित होगी। मंत्री ने कहा कि शंकर किशोर महतो द्वारा बताई गई सभी बातों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंचायी जाएगी और उन्हें मुख्यमंत्री से मिलवाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही गांव की जिन समस्याओं को सामने रखा गया है, उनके समाधान की दिशा में भी पहल की जाएगी। शंकर कुमार महतो ने यह भी कहा कि जिस उद्देश्य के साथ झारखंड को अलग किया गया था, वो आज भी पूरी नहीं हो सकी। आज भी राज्य के लोग आज भी दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। आंदोलन से पहले जो समस्या थी, वो आज भी है। बहरहाल, पहले की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है और आगे भी प्रयास जारी रहेंगे।