रघुवर दास
राहुल गांधी का "वोट चोरी" आंदोलन और उसके साथ खड़े तिलचट्टे, कम्युनिस्ट भारत में रिजिम चेंज का सपना देख रहे हैं, जो कभी पूरा नहीं होगा। राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों को भी इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन ऐसे आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से समाधान खोजना भी उतना ही आवश्यक है। केवल झूठे नारों और आरोपों से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।

तिलचट्टों का आंदोलन कांग्रेस और वामपंथियों का लटकन बन गया
भारत का इतिहास गवाह है कि यहां सत्ता का फैसला जनता बैलेट से करती है। इंदिरा गांधी की तानाशाही का अंत भी बैलेट से ही हुआ था। जो ताकतें हिंसा के बल पर सत्ता चाहती हैं, उनकी जड़ें जनता में नहीं हैं। 1962 में कम्युनिस्टों ने चीन का साथ दिया था। आज जनता उन्हें खारिज कर चुकी है और किसी राज्य में उनकी सरकार नहीं है। गृह मंत्री अमित शाह की दूरदर्शिता से नक्सलवाद की रीढ़ टूट चुकी है। तिलचट्टों का आंदोलन शिक्षा सुधार के नाम पर शुरू हुआ, पर देखते-देखते कांग्रेस और वामपंथियों का लटकन बन गया। इसके एजेंडे और फंडिंग पर अब तक कोई स्पष्टता नहीं है। सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स का अचानक जुड़ना भी सवाल खड़े करता है। इसके पीछे विदेशी शक्तियों की साजिश है, यह प्रमाणित हो चुका है।

वोट चोर" का नारा भी "चौकीदार चोर वाले नारे की तरह दम तोड़ेगा
रिजिम चेंज का समर्थन सबसे ज्यादा घुसपैठिये और चरमपंथ की राजनीति करने वाले लोग कर रहे हैं। अभी हाल में ही फ्रांस में हुए दंगों में भी यही बात सामने आई है। नक्सलवाद और उग्रवादी हिंसा ने देश के अनेक क्षेत्रों में विकास और शांति के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी की हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली किसी भी हिंसक प्रवृत्ति का विरोध आवश्यक है। साथ ही, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, मतदाता सूची को निष्पक्ष बनाना और किसी भी पात्र मतदाता को उसके अधिकार से वंचित न होने देना भी जरूरी है। शाहीन बाग हो या "वोट चोर" का नारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धैर्य और दूरदर्शिता से हर चुनौती का सामना किया। एसआईआर ने देश की संप्रभुता को मजबूत किया है और घुसपैठियों को नागरिकता से वंचित किया है।"वोट चोर" का नारा भी "चौकीदार चोर है" की तरह दम तोड़ेगा, क्योंकि मोदी सरकार जीवंत है और जनकल्याणकारी भी। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष, दोनों की जवाबदेही जनता के प्रति है। भारत में सत्ता परिवर्तन का एकमात्र वैध रास्ता मतपत्र है, हिंसा या अराजकता नहीं। अंततः लोकतंत्र की ताकत जनता के विश्वास, संविधान और बैलेट में निहित है।
(लेखक झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं ओडिशा के पूर्व राज्यपाल हैं।)
.jpeg)