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हजारीबाग : बड़कागांव के 7 युवाओं ने JPSC में पाई सफलता, खेत से खदान और अब कलम तक की जीत

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के हजारीबाग जिले का बड़कागांव प्रखंड इन दिनों खुशी, गर्व और प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है। कभी धान का कटोरा कहे जाने वाला यह इलाका आज प्रशासनिक सेवा में प्रवेश करने वाले मेधावियों की वजह से चर्चा में है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) 2023 के फाइनल रिजल्ट में बड़कागांव के 7 प्रतिभाशाली युवाओं ने सफलता प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे प्रखंड और जिले का नाम रोशन किया है।

बड़कागांव की पहचान कोयले की खदानों और विस्थापन की कहानियों से जुड़ी रही है। लेकिन इससे पहले यह क्षेत्र अपनी उपजाऊ जमीन, भरपूर धान की खेती, सब्जी उत्पादन और शुद्ध गुड़ निर्माण के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां का कच्चा गुड़ कभी पूरे झारखंड और बिहार के बाजारों में ऊंची मांग रखता था। बाद में कोल खनन और औद्योगिकीकरण ने इस इलाक़े का चेहरा बदला, और इसके साथ ही विस्थापन, बेरोजगारी और आर्थिक असंतुलन भी सामने आए। लेकिन बड़कागांव ने हार नहीं मानी, यहां की मिट्टी में सिर्फ अनाज नहीं, संघर्ष और संकल्प भी उपजता है।
झारखंड JPSC परीक्षा 2023 में कुल 342 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। इनमें से बड़कागांव प्रखंड से ही 7 युवाओं ने प्रशासनिक पदों पर अपनी जगह बना ली। यह संयोग नहीं, बल्कि बड़कागांव की शैक्षणिक जागरूकता और बदलते दृष्टिकोण का परिणाम है।

JPSC में चयनित बड़कागांव के अभ्यर्थी:
1    रोबिन कुमार
2    सावित्री कुमारी उर्फ गुड़िया    
3    विपिन कुमार भास्कर उर्फ गौतम
4    प्रियंका कुमारी    
5    मनीष कुमार    
6    नीतीश कुमार    
7    अनिमेष कुमार

इन सफल अभ्यर्थियों में से कई साधारण परिवार से आते हैं। कोई किसान का बेटा है, तो कोई खनन प्रभावित क्षेत्र का निवासी। किसी के पिता ठेठ ग्रामीण जीवन जीते हैं, तो किसी ने अकेले ही पढ़ाई और रोज़गार के बीच संतुलन बनाया। लेकिन एक बात सबमें समान रही, जज़्बा, लगन और कठिन परिश्रम। यह परिणाम दर्शाता है कि अब बड़कागांव के युवा सिर्फ मजदूरी, विस्थापन या सीमित अवसरों के चक्र में उलझे नहीं हैं। वे अब सिविल सेवा, नेतृत्व और प्रशासन में अपनी भूमिका तय कर रहे हैं। इससे पूरे इलाके में एक सकारात्मक बदलाव की लहर है।
ग्राम गंगादोहर, सांढ, बादम, अंबाजीत, उरुब हर गांव में जश्न जैसा माहौल है। लोग मिठाई बांट रहे हैं, ढोल नगाड़े बज रहे हैं, और युवाओं के चेहरे पर भविष्य के सपनों की चमक साफ झलक रही है। गांव के बुजुर्ग कह रहे हैं, “हमने तो अपने बच्चों को खेतों में काम करते देखा था, अब उन्हें वर्दी और कुर्सी पर बैठा देखेंगे।” इन 7 सफल छात्रों ने अपने आसपास के युवाओं को भी ये संदेश दिया है, "कोचिंग शहर में है, लेकिन मेहनत गांव में होती है।" बड़कागांव की इस उपलब्धि ने एक नई इबारत लिख दी है एक ऐसा क्षेत्र जो धान, कोयला और गुड़ से शुरू होकर अब कलम और प्रशासन तक पहुंच गया है। यह केवल 7 अभ्यर्थियों की सफलता नहीं, पूरे समाज की जीत है।


 

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