जमशेदपुरः
चांडिल डैम के निर्माण को लगभग 39 साल हो गये हैं। इसके निर्माण के वक्त 116 गांव के 19,115 परिवारों विस्थापित किया गया था। इसके लिए 22 पुनर्वास स्थल बने, लेकिन अब तक उन्हें जमीन का पट्टा तक नहीं मिल पाया। इस बांध के निर्माण के 39 साल बीत जाने के बाद भी 12321 परिवार अभी तक पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं। इस बार के विधानसभा बजट सत्र में भी विस्थापितों का मामला उठा था। विधायक सुदेश महतो ने डैम और विस्थापितों को मुआवजे के मसले पर सरकार से जानकारी मांगी थी।

पुनर्वास स्थलों को विकसित किया जा रहा
13 पुनर्वास स्थलों पर सभी मूलभूत सुविधाएं दी जा चुकी हैं, यहां 1358 विस्थापित परिवार अभी रह रहे हैं। बाकी 9 पुनर्वास स्थलों को विकसित किया रहा है। पुनरीक्षित पुनर्वास नीति-2012 के प्रावधानों (कंडिका-5, 1 (क)) के मुताबिक ऐसे विस्थापित परिवार जिनकी जमीन सरकार के स्तर से अर्जित की जाती है, उन्हें 12.50 डिसमिल जमीन पुनर्वास स्थल में निःशुल्क दी जाती है।
अगर कोई परिवार जमीन नहीं लेना चाहते हैं तो उसके एवज में उसे जमीन के लिये दो लाख रुपये दिये जायेंगे। सरकार के अनुसार 19115 विस्थापित परिवारों में से 1358 परिवारों को बसाया जा चुका है।

सांसद ने भी उठाया था मामला
पिछले साल लोकसभा में सांसद संजय सेठ ने यह मामला उठाया था। उन्होंने कहा था कि जल शक्ति मंत्रालय इस बांध को उपयोगी बनाए ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था हो सके। बिजली का उत्पादन होने के साथ डैम बनाने के उद्देश्यों को पूरा किया जा सके। 4 दशक बाद भी इसका उपयोग जनहित में नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में सकारात्मक पहल करने के लिए कहा था।