द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग की 10 महिला कलाकारों ने राष्ट्रपति भवन में अपने हुनर का जादू दिखाया है। उन्होंने 5000 वर्ष पुरानी सोहराय और कोहबर कला को जीवंत किया। ये महिलाएं 14 से 24 जुलाई 2025 तक राष्ट्रपति भवन में रहकर हजारीबाग की लोक कला का प्रदर्शन करने आईं थीं, जिसमें उनके बनाए चित्रों में आदिवासी जीवन, पेड़-पौधे, जानवर और पक्षियों की खूबसूरत झलक थी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन कलाकारों की कला की सराहना की और कहा कि महिलाओं द्वारा परंपरागत लोक कला को जीवित रखने का यह कार्य बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इन कलाकारों से मुलाकात की और उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।

इन कलाकारों में रुदन देवी, अनीता देवी, सीता कुमारी, मालो देवी, सजवा देवी, पार्वती देवी, आशा देवी, कदमी देवी, मोहिनी देवी और रीना देवी शामिल थीं। ये कलाकार कपड़े पर मिट्टी के रंग और बांस से बने ब्रश का इस्तेमाल करके अपनी कला का प्रदर्शन करती हैं। इस आयोजन को 'आवासीय कलाकार कार्यक्रम' के तहत राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया था।
रुदन देवी ने बताया कि वह पहले कभी बाहर नहीं गई थीं, लेकिन इस अवसर पर दिल्ली और राष्ट्रपति भवन तक का सफर उनके लिए अविस्मरणीय था। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति भवन बहुत ही सुंदर है और यहां का स्वागत कभी नहीं भूल सकती।"

हजारीबाग की सोहराय और कोहबर कला 5000 साल पुरानी है और इसे आज भी बड़कागांव के गुफाओं में देखा जा सकता है। इस कला पर शोध भी जारी है। आदिवासी महिलाएं खास अवसरों पर जैसे फसल कटाई या त्योहारों के समय अपने घरों की दीवारों पर इस कला के चित्र बनाती हैं। इस कलाकृति को 2020 में GI टैग भी प्राप्त हुआ है।
