द फॉलोअप डेस्क
आज 11 जनवरी को झारखंड की राजनीति और आदिवासी संघर्ष के प्रतीक देशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जन्म जयंती मनाई गई। इस अवसर पर पूर्वी सिंहभूम में आयोजित प्रथम साहित्य उत्सव के दौरान उनके जीवन पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी स्थल पर जिले के डीसी कर्ण सत्यार्थी, डीडीसी नागेंद्र पासवान सहित सभी अधिकारी उपस्थित रहे। देशभर से आए साहित्यकार, कवि, लेखक और अन्य अतिथि वहां नतमस्तक होकर गुरुजी को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते नजर आए।
प्रदर्शनी में गुरुजी के जीवन की महत्वपूर्ण झलकियां प्रदर्शित की गईं। इसमें उनके पैतृक घर, माता-पिता के साथ के क्षण, और आदिवासी जीवन से जुड़े संस्कार को दर्शाने वाली तस्वीरें शामिल थीं। यह प्रदर्शनी दर्शकों को केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए बनाई गई थी। एक विशेष हिस्सा गुरुजी की फोटोग्राफी और आंदोलन की लंबी यात्राओं को समर्पित था। इसमें उनका कैमरा थामे और सड़क पर चलने का दृश्यमान संघर्ष दर्शाया गया। यह उनके आंदोलन की निरंतरता और लोगों के बीच पहुंच की जिद को उजागर करता है।.jpeg)
प्रदर्शनी के मध्य भाग में पोखरिया आश्रम और झामुमो के गठन से जुड़ी तस्वीरें प्रदर्शित थीं। इन तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि गुरुजी का आंदोलन सत्ता के लिए नहीं, बल्कि पीढ़ियों और आदिवासी समाज की भलाई के लिए था। अंतिम हिस्से में उनके सत्ता में आने के क्षण जैसे राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों शपथ ग्रहण की तस्वीरें भी थीं। इन तस्वीरों में उनकी आंखों में सत्ता का गर्व नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भाव झलकता है।
तीन दिवसीय साहित्य उत्सव में यह प्रदर्शनी सबसे अलग रही। यहां साहित्य शब्दों में नहीं, जीवन में लिखा गया नजर आया। दर्शक आखिरी फ्रेम के सामने ठहरते ही महसूस कर सकते थे कि गुरुजी भले हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन झारखंड की स्मृति, संघर्ष और आत्मा में वे हमेशा जीवित हैं।