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सिस्टम बेबस, मानवता शर्मसार : सड़क नहीं, इलाज नहीं-आदिम जनजाति की गर्भवती महिला की तड़पती मौत

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द फॉलोअप डेस्क

गुमला जिला के घाघरा प्रखंड क्षेत्र के सुदूरवर्ती दीरगांव पंचायत अंतर्गत झलकापाट गांव से मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां गर्भवती महिला सुकरी कुमारी को पति जगरनाथ कोरवा सहित परिजनों ने सड़क के अभाव में झीलगी में लादकर लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर काड़ा सिल्ली गांव तक पहुंचाया। वहां से ममता वाहन एंबुलेंस की सहायता से महिला को घाघरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
बताया गया कि झलकापाट गांव में आज तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है, जिसके कारण एंबुलेंस या अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। गांव का भौगोलिक क्षेत्र पूरी तरह पठारी और दुर्गम है। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। ऐसे में बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचाना परिजनों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इस घटना में भी परिजनों ने जोखिम उठाते हुए गर्भवती महिला को कंधे पर उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के लगभग 78 साल बीत जाने के बाद भी झलकापाट गांव में सड़क नहीं बन पाई है। लेकिन आज तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। सड़क नहीं होने के कारण गांव के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि झलकापाट गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए अविलंब सड़क निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज या गर्भवती महिला को इस तरह की पीड़ा न सहनी पड़े। घाघरा प्रखंड मुख्यालय से यह क्षेत्र लगभग 30 किलोमीटर दूर है, लेकिन विकास की दूरी इससे कहीं ज्यादा नजर आती है। यह घटना एक बार फिर सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। बता दे की काड़ासिल्ली गांव तक भी जान जोखिम में लेकर ममता वाहन चालक वाहन लेकर पहुंचा था।
 

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