सिमडेगा
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड की सीमा पर स्थित विश्वविख्यात प्राकृतिक पर्यटन स्थल डाडिंग इस बार अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ मानवीय संवेदना की एक मिसाल को लेकर चर्चा में है। उपायुक्त सिमडेगा कंचन सिंह के एक छोटे से, लेकिन बेहद प्रभावशाली फैसले ने यह साबित किया कि प्रशासन अगर चाहे तो किसी बच्चे के जीवन में रोशनी भर सकता है। डाडिंग भ्रमण के दौरान उपायुक्त की नजर एक मासूम बच्चे पर पड़ी, जो पर्यटक मित्र के पीछे सकुचाया खड़ा था। बातचीत में बच्चे ने अपना नाम देवानन्द बताया। आगे की चर्चा में सामने आया कि देवानन्द सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। लंबे इलाज के कारण वह नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पा रहा है और उसके पिता उसे अकेला छोड़ने से डरते हैं।

बच्चे की स्थिति जानकर उपायुक्त भावुक हुए, लेकिन उन्होंने संवेदनशीलता को कार्रवाई में बदला। मौके पर ही प्रखंड विकास पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि देवानन्द के इलाज की पूरी व्यवस्था प्रशासन की निगरानी में सुनिश्चित की जाए। साथ ही उसकी पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए घर पर ही शिक्षा की व्यवस्था और आवश्यक किताबें उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया।
देवानन्द की आंखों में झलकती जिज्ञासा और पढ़ने की ललक देखकर उपायुक्त ने कहा कि बीमारी किसी बच्चे के सपनों की राह नहीं रोक सकती। यह जिम्मेदारी प्रशासन और समाज दोनों की है कि वह ऐसे बच्चों का साथ दें।
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संयोग से यह दिन झारखंड निर्माता दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती का भी था। इस पहल को मुख्यमंत्री के उस संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि झारखंड का हर बच्चा पढ़े, इसके लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
उपायुक्त सिमडेगा की यह पहल न सिर्फ देवानन्द के जीवन में उम्मीद की किरण बनी, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि जिला प्रशासन कागज़ी आदेशों तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीन पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है। जिले का कोई भी बच्चा यदि शिक्षा, स्वास्थ्य या पोषण से वंचित है, तो उसकी जानकारी सीधे व्हाट्सऐप के माध्यम से साझा करें, ताकि समय रहते सहायता पहुंचाई जा सके।
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