द फॉलोअप डेस्क
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल 4 अगस्त को फिर से भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। ट्रंप ने पहले ही भारत पर 25% टैरिफ बढ़ाने और जुर्माना लगाने की बात कही है। इसके बाद भारत सरकार ने निर्यातकों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। करीब 20,000 करोड़ की इस प्रस्तावित योजना का उद्देश्य वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ जैसे झटकों से भारतीय निर्यातकों को बचाना है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, "नया एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन" सितंबर तक लागू किया जा सकता है। इसमें आसान एक्सपोर्ट क्रेडिट, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करना, 'ब्रांड इंडिया' को सशक्त करना, ई-कॉमर्स के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट और ट्रेड फैसिलिटेशन जैसे उपाय शामिल होंगे।

इस योजना का एक अहम हिस्सा MSME निर्यातकों के लिए होगा, जिन्हें कम या बिना गारंटी के लोन की सुविधा दी जाएगी, बशर्ते उनकी क्रेडिट योग्यता और निर्यात सीमा तय हो। यह एक संयुक्त प्रयास होगा जिसमें वाणिज्य, MSME और वित्त मंत्रालय शामिल हैं। ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट करते हुए भारत पर आरोप लगाया कि वह रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है और फिर उसे मुनाफे के लिए वैश्विक बाजार में बेच रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके चलते अमेरिका भारत पर टैरिफ "काफी हद तक" बढ़ाएगा।
भारत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "किसी एक देश को इस तरह निशाना बनाना अनुचित और अव्यावहारिक है।" विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि रूस से व्यापार केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) भी कर रहे हैं — जिसमें ऊर्जा, उर्वरक, रसायन, स्टील, मशीनरी और यूरेनियम जैसे उत्पाद शामिल हैं।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाई ने कहा, "इस चुनौतीपूर्ण समय में अगर सरकार इतनी बड़ी राशि से निर्यात को समर्थन देती है, तो यह एक सकारात्मक संकेत होगा।"
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना न केवल अमेरिकी बाजार के लिए, बल्कि अन्य वैश्विक बाजारों में भी भारत के निर्यात को मजबूती दे सकती है। साथ ही, यह भारत को जापान, कोरिया और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों की तर्ज पर वैश्विक ब्रांड पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।
