ब्रिजटाउन (बारबाडोस)
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक सच्चाई है जो पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही है, और ऐसे दौर में “ग्रीन ग्रोथ” ही हमारा साझा भविष्य है। वे 68वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (CPA) में ‘द कॉमनवेल्थ – ए ग्लोबल पार्टनर’ विषय पर आयोजित महासभा बहस को संबोधित कर रहे थे।
हरिवंश ने कहा कि हमें जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग और साझेदारी को मज़बूत करना होगा। उन्होंने खास तौर पर ग्लोबल साउथ और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) का जिक्र करते हुए कहा कि ये देश जलवायु परिवर्तन के सबसे गंभीर दुष्प्रभाव झेल रहे हैं। समुद्र के बढ़ते स्तर से इनका अस्तित्व तक खतरे में है।
उन्होंने कहा, “भारत इन छोटे देशों की चुनौतियों को लेकर पूरी तरह से सजग है। हम ग्रीन ग्रोथ और सतत विकास के एजेंडे पर उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं।”

हरिवंश ने जलवायु एवं ऊर्जा क्षेत्र में भारत की पहल—इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA)—का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संगठन सभी के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को सुलभ बनाने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अपने संबोधन में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका को भी याद किया। हरिवंश ने बताया कि भारत ने 100 से अधिक देशों, जिनमें कई कॉमनवेल्थ सदस्य भी शामिल हैं, को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराईं।
उन्होंने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (ITEC) की सफलता पर भी प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम के तहत अब तक 160 से अधिक देशों के 2 लाख से अधिक अधिकारियों को नागरिक और रक्षा दोनों क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 2014 के बाद से भारत ने अपने संस्थानों में लगभग एक लाख उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और छात्रवृत्तियां प्रदान की हैं।

इस सम्मेलन में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं। उनके साथ उपसभापति हरिवंश, सांसद अनुराग शर्मा, डॉ. डी. पुरंदेश्वरी, डॉ. के. सुधाकर, डॉ. अजीत गोपचड़े, डी. रेखा शर्मा और विभिन्न राज्यों के पीठासीन अधिकारी शामिल हैं। लोकसभा और राज्यसभा के महासचिव भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।
