द फॉलोअप डेस्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी एक बार फिर वैश्विक व्यापार पर नए दबाव ला रही है। इस बार निशाना बना है सेमीकंडक्टर और चिप सेक्टर को, जहां अमेरिका अब 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। इसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है, जो इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पैठ बनाने की कोशिश में हैं। ट्रंप प्रशासन पहले ही भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लागू कर चुका है, और 27 अगस्त से अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क भी लगने जा रहा है। अब अगर चिप्स और सेमीकंडक्टर पर प्रस्तावित 100 फीसदी टैरिफ लागू होता है, तो इससे भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की ग्रोथ को बड़ा झटका लग सकता है।

भारत बन रहा है ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब
भारत तेजी से सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और चिप डिजाइन के क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है। मोदी सरकार का फोकस इस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने और निर्यात को बढ़ाने पर है। तमिलनाडु, गुजरात और तेलंगाना में मेगा फैब प्रोजेक्ट्स शुरू हो चुके हैं और निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2022 में करीब 23.2 अरब डॉलर का था, जो 2023 में 38 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2024-25 में इसके 50 अरब डॉलर पार करने की संभावना है। 2030 तक इस बाजार के 100-110 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है — जो भारत को चीन और अमेरिका जैसे बड़े खिलाड़ियों की कतार में ला सकता है।

100% टैरिफ से भारत के निर्यात पर असर संभव
भारत धीरे-धीरे न सिर्फ घरेलू मांग पूरी कर रहा है, बल्कि चिप और सेमीकंडक्टर उत्पादों का निर्यात भी शुरू कर चुका है। अमेरिका इस समय भारत के लिए एक बड़ा संभावित निर्यात बाजार है। लेकिन अगर वहां 100% टैरिफ लगा दिया जाता है, तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमताओं पर असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के चिप एक्सपोर्ट की लागत बढ़ेगी और अमेरिकी मार्केट में भारत का प्रभाव सीमित हो सकता है। यही नहीं, इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि भारत को अब एक सप्लाई हब के रूप में देखा जा रहा है — खासकर चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक कोशिशों के बीच।
क्या भारत तैयार है ऐसे झटकों के लिए?
भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' नीतियों का मकसद सेमीकंडक्टर जैसे उच्च तकनीकी सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। लेकिन अमेरिकी टैरिफ जैसे कदम उस रफ्तार को धीमा कर सकते हैं।
हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि Apple जैसी कंपनियां जो अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग करती हैं, उन पर यह टैरिफ लागू नहीं होगा। यह दर्शाता है कि अमेरिका अब टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा के लिए आक्रामक रणनीति अपना रहा है।
