द फॉलोअप डेस्क
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वेंस ने कहा कि पाकिस्तान में लंबी बातचीत के बाद भी ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हो पाया। वेंस ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार छोड़ने के लिए राज़ी नहीं हुआ। ईरान के विदेश मंत्रालय ने सरकारी मीडिया को बताया कि "दो या तीन" अहम मुद्दों पर असहमति की वजह से समझौता नहीं हो पाया।
वहीं, बातचीत खत्म होने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस्लामाबाद अपनी मध्यस्थ की भूमिका "निभाता रहा है और आगे भी निभाता रहेगा।" इस बीच लेबनान के दक्षिणी हिस्से में इज़रायल के हमले पूरी रात जारी रहे। सरकारी मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक हमले में एक घर को निशाना बनाया गया, जिसमें कुछ लोगों की मौत हो गई और कुछ घायल हो गए।

क्या कहा अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने
मिली खबरों के मुताबिक शनिवार को इस्लामाबाद में सुबह में शुरू हुई और पूरी रात चलकर रविवार सुबह तक चली। लेकिन युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने का कोई समझौता नहीं निकल पाया। बातचीत के बाद वेंस ने कहा, "मुझे लगता है कि यह ईरान के लिए ज़्यादा बुरी खबर है, न कि अमेरिका के लिए। इसलिए हम बिना किसी समझौते पर पहुंचे ही अमेरिका वापस जा रहे हैं।"
वेंस ने आगे कहा कि ईरान के वार्ताकारों ने समझौते के लिए अमेरिका की शर्तें मानने से इनकार कर दिया, जबकि उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि ये शर्तें "काफी लचीली" थीं। उन्होंने कहा, "हम काफी मिलनसार थे। राष्ट्रपति ने हमसे कहा था, 'आपको यहां नेक इरादे से आना चाहिए और समझौता करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करनी चाहिए।' हमने वैसा ही किया, लेकिन बदकिस्मती से, हम कोई खास प्रगति नहीं कर पाए।"

ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने का कोई वादा नहीं किया
उपराष्ट्रपति वेंस के अनुसार, घंटों चली बातचीत के बाद भी ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने का कोई वादा नहीं किया। वेंस ने मीडिया से कहा, "सवाल यह है कि, 'क्या हमें ईरानियों में परमाणु हथियार न बनाने की कोई पक्की इच्छाशक्ति दिखाई देती है? न सिर्फ अभी, न दो साल बाद, बल्कि लंबे समय के लिए?' हमें अभी तक ऐसा कुछ नहीं दिखा है, लेकिन हमें उम्मीद है कि आगे दिखेगा।"
इस बीच, ईरान के सरकारी मीडिया ने बातचीत की विफलता का ठीकरा अमेरिका की "हद से ज़्यादा" मांगों पर फोड़ा है। समाचार एजेंसी 'तस्नीम' ने इस्लामाबाद से रिपोर्ट दी है, "ईरान और अमेरिका की टीमों के बीच बातचीत कुछ मिनट पहले ही खत्म हुई है। अमेरिका की 'हद से ज़्यादा दखलंदाज़ी और महत्वाकांक्षाओं' के चलते, दोनों पक्ष अब तक किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए।"
.jpeg)