द फॉलोअप डेस्क
लंदन, ब्रुसेल्स, बर्लिन समेत यूरोप के कई बड़े एयरपोर्टों पर Muse सॉफ्टवेयर को निशाना बनाकर हुए साइबर अटैक के बाद परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस घटना के चलते चेक-इन, बोर्डिंग और बैगेज ड्रॉप जैसी इलेक्ट्रॉनिक सेवाएं ठप्प पड़ीं, यात्रियों को मैन्युअल प्रक्रियाओं के सहारे काम चलाना पड़ा, और कई उड़ानें रद्द हुईं, जबकि कुछ में देरी हुई।

क्या है समस्या का मूल कारण?
• इस अटैक का केंद्रबिंदु Collins Aerospace कंपनी का Muse (Multi-User System Environment) सॉफ्टवेयर है, जिसका इस्तेमाल कई एयरपोर्टों पर चेक-इन कियोस्क, बोर्डिंग पास प्रिंटिंग और बैगेज टैगिंग जैसी सेवाओं के लिए होता है। सॉफ्टवेयर भ्रष्ट होने से एयरपोर्टों को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से हटकर मैन्युअल प्रक्रियाएँ अपनानी पड़ीं, जिससे समय प्रबंधन, सुरक्षा जांच व यात्रियों की सुविधा पर असर पड़ा। उदाहरण के लिए, ब्रुसेल्स एयरपोर्ट ने घोषणा की है कि नौ उड़ानें पूरी तरह से रद्द हुईं, चार मार्ग बदले गए, और कम-से-कम 15 उड़ानों में देरी हुई है।

भारत की स्थिति और सरकार की प्रतिक्रिया
• भारत सरकार इस घटना के प्रकाश में पूरी तरह से सतर्क हो गई है, क्योंकि दिल्ली एयरपोर्ट सहित कुछ एयरपोर्टों पर मौजूदा सूचना है कि यही Muse सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहा है।
• हालांकि, वर्तमान में कोई विश्वसनीय सूचना नहीं मिली है कि इस साइबर अटैक का भारत में कोई वास्तविक प्रभाव हुआ हो। सरकारी सूत्रों का कहना है कि जांच की जा रही है और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की समीक्षा की जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, एयरपोर्ट प्रबंधन और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने, बैक-अप मेथड तैयार रखने और यात्री सूचना तंत्र को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यदि कोई समस्या उत्पन्न हो, तो उसका त्वरित समाधान हो सके।
