द फॉलोअप डेस्क
यमन में हत्या के आरोप में फांसी की सज़ा पा चुकी केरल की 37 वर्षीय नर्स निमिष प्रिया को आखिरी वक्त पर बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को उन्हें फांसी दी जानी थी, लेकिन सोमवार देर शाम एक अहम बैठक के बाद यमन सरकार ने उनकी सज़ा टाल दी है। यह फैसला सूफ़ी विद्वान शेख हबीब उमर की अगुवाई में हुई बातचीत के बाद सामने आया।
पलक्काड की रहनेवाली निमिष प्रिया पर यमनी नागरिक मह्दी की हत्या का आरोप है, जिसे लेकर उन्हें अदालत से मौत की सज़ा मिली थी। नियम के मुताबिक, अगर पीड़ित पक्ष चाहे तो 'ब्लड मनी' (रक्त-पुनरावृत्ति क्षतिपूर्ति) के रूप में 8.6 करोड़ रुपये लेकर माफ़ कर सकता था, लेकिन मह्दी के परिवार ने यह रकम स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

इस इनकार के बाद माना जा रहा था कि निमिष प्रिया की फांसी अब तय है। लेकिन अंतिम क्षणों में यमन में प्रभावशाली सूफ़ी संतों ने पहल की। शेख हबीब उमर की अध्यक्षता में हुई एक विशेष बैठक में सज़ा को कुछ समय के लिए टालने का निर्णय हुआ। यमन में धार्मिक विद्वानों की बात को सरकार अहमियत देती है, इसी वजह से यह मध्यस्थता संभव हुई।
अब प्रयास हो रहा है कि मह्दी के परिवार को पुनः बातचीत के ज़रिये तैयार किया जाए ताकि वे ब्लड मनी स्वीकार करें और निमिष प्रिया की जान बचाई जा सके। इस घटनाक्रम से भारत में भी उम्मीद जगी है, जहां कई सामाजिक संगठनों ने प्रिया के लिए हस्तक्षेप की मांग की थी।
