रांची
सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड द्वारा आयोजित “नेशनल पीआर कॉनक्लेव–2025” का सफलता पूर्वक समापन हुआ। दूसरे दिन 9 अक्टूबर को सीसीएल मुख्यालय स्थित गंगोत्री कन्वेंशन सेंटर, रांची में संवाद, नवाचार और प्रेरणा से भरे कई सत्रों का आयोजन हुआ। “रिडीफाइनिंग पीआर :: फ्रॉम इनफार्मेशन टू इंगेजमेंट इन द एरा ऑफ़ डिजिटलाइजेशन ” अर्थात “जनसंपर्क का पुनर्परिभाषण : सूचना से सहभागिता तक, डिजिटल युग के संदर्भ में” विषय पर आधारित इस दो दिवसीय आयोजन में जनसंपर्क जगत के दिग्गजों, मीडिया विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने मिलकर संवाद, अनुभव और नवाचार का एक जीवंत मंच तैयार किया। कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत “रोल ऑफ़ रेडियो: इनफार्मेशन टू इंगेजमेंट स्पेशली इन रूरल एरियाज ” विषय से हुई। रेडियो ऑरेंज, नागपुर की सीईओ इनू मजूमदार ने प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि रेडियो केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि यह भावनाओं का सेतु है जो ग्रामीण भारत को एक सूत्र में जोड़ता है। उन्होंने कहा कि साउंड की शक्ति संवाद को जीवंत बनाती है और जनजागरूकता अभियानों में रेडियो आज भी सबसे प्रभावी माध्यम है।
इसके बाद “न्यू ऐज ऑफ़ पीआर इन द चेंजिंग डिजिटल वर्ल्ड ” विषय पर डॉ समीर कपूर, डायरेक्टर, ऐड फैक्टर्स, दिल्ली ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज पीआर 2.0 का युग है, जहाँ डिजिटल मीडिया, यूट्यूबर्स और इंफ्लुएंसर्स जनसंपर्क की दिशा तय कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज हर क्लिक, हर व्यू, और हर पोस्ट कंपनी की छवि गढ़ने में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में एंगेजमेंट की भूमिका काफी अधिक मायने रखता है और यह तभी संभव है जब संवाद रणनीतिक और भावनात्मक हो।.jpeg)
इसके उपरांत “रिलेवांस ऑफ़ कस्टमिजेड स्टाम्प फॉर कोल इंडस्ट्री इन गोल्डन जुबिली ईयर ” विषय पर आलोक कुमार गुप्ता, विभागाध्यक्ष, सीसी एवं पीआर, सीसीएल ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर कोल इंडिया के 50 वर्ष पूरे होने पर अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, सीसीएल, निलेंदु कुमार सिंह, निदेशक (वित्त), पवन कुमार मिश्रा, निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र, निदेशक, पोस्टल सर्विस, झारखंड, आर. वी.चौधरी, ने डाक विभाग द्वारा स्पेशल कवर (customize stamp ticket) एवं सॉवेनियर “नवचेतना” का भव्य लोकार्पण किया।
यह विशेष डाक टिकट कोल इंडिया और सीसीएल के उन ‘कोल वारियर्स’ को समर्पित है, जिन्होंने देश की ऊर्जा सुरक्षा को सशक्त आधार दिया है। यह स्टांप केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि मेहनत, समर्पण और राष्ट्रनिर्माण में लगे प्रत्येक कर्मी के गौरव का प्रतिबिंब है, जो कंपनी की नई परिभाषा और प्रेरणादायक पहचान को दर्शाता है।

मुख्य अतिथि सीएमडी सीसीएल निलेंदु कुमार सिंह, ने अपने संबोधन में कहा कि “डाक टिकट सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि भावनाओं का वाहक है — यह दिलों को जोड़ने वाला प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भी पत्र और डाक की आत्मा जीवित है - यह संवाद की सबसे ईमानदार विधा है। हर्षनाथ मिश्र, निदेशक (मानव संसाधन), सीसीएल ने अपने संबोधन में कहा कि पब्लिक रिलेशन किसी भी संस्थान की रीढ़ है, जो जनता और संगठन के बीच सेतु का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि सीसीएल अपनी ऊर्जा, सुरक्षा, CSR और सामाजिक पहलों के माध्यम से जनता से सीधे जुड़ाव बनाकर रखती है और यह जुड़ाव ही वास्तविक जनसंपर्क है।.jpg)
दिन के दूसरे सत्र में “कैरियर इन पीआर एंड कम्युनिकेशन: चैलेंजस एंड ओप्पोर्टनिटीज इन द एरा ऑफ़ डिजिटलइजेशन ” विषय पर डॉ. विकास पाथे, सहायक प्रोफेसर, आईआईएम रांची ने कहा कि प्रभावी संवाद के लिए टारगेट ऑडियंस की समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्रों से कहा कि सीखने और अध्ययन की प्रक्रिया जनसंपर्क के हर स्तर पर निरंतर चलती रहनी चाहिए।
अगले सत्र “पॉजिटिव मीडिया मास्टरी: क्राफ्ट योर ब्रांड स्टोरी ” में संजीव शेखर, कॉर्पोरेट अफेयर्स, अदाणी पावर लिमिटेड ने कहा कि पॉजिटिव मीडिया मैसेजिंग कंपनी की ब्रांड वैल्यू का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि “लोग आपकी उपस्थिति में नहीं, आपकी अनुपस्थिति में क्या कहते हैं, वही आपकी सच्ची छवि है।”.jpeg)
कार्यक्रम के समापन सत्र “इंटरएक्टिव सेशन विथ द बड्डिंग पीआर प्रोफेशनल्स ” में छात्रों ने सीधे एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़ से संवाद किया। इस सत्र में युवा प्रतिभाओं ने जनसंपर्क, मीडिया और क्रिएटिविटी से जुड़े विविध प्रश्न पूछे, जिनका एड गुरु ने सहजता और अनुभवजन्य दृष्टिकोण से उत्तर दिया। समापन अवसर पर विभागाध्यक्ष, सीसी एवं पीआर, आलोक कुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि “यह कॉनक्लेव विचारों का संगम और जनसंपर्क के भविष्य की नई दिशा तय करने वाला मंच सिद्ध हुआ है।”
“नेशनल पीआर कॉनक्लेव-2025” ने यह सिद्ध किया कि जनसंपर्क अब केवल सूचना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सहभागिता, सहानुभूति और सतत संवाद की सशक्त प्रक्रिया बन चुका है जो संगठनों को समाज से जोड़ता है और विश्वास की नई परिभाषा गढ़ता है।