द फॉलोअप डेस्क
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 13 मार्च को झारखंड पुलिस को पहले चरण में कुल 1475 गश्ती वाहन सौंपे। इसमें 638 चारपहिया और 849 दोपहिया वाहन शामिल हैं। रांची जिले को 80 बोलेरो और 849 दोपहिया वाहन मिले हैं। राज्य पुलिस का कहना है कि इन वाहनों का उद्देश्य अपराध नियंत्रण और गश्ती व्यवस्था को और बेहतर बनाना है। हालांकि नए वाहन मिलने के बावजूद अधिकांश थाने अब भी गश्ती वाहन प्राइवेट चालकों पर निर्भर हैं। रांची जिले में सरकारी चालक के तौर पर 214 आरक्षी और 24 हवलदार तैनात हैं, यानी कुल 238 सरकारी चालक हैं। एसएसपी, एसपी, डीएसपी और थाना प्रभारियों के वाहन सरकारी चालकों द्वारा चलाए जाते हैं, लेकिन गश्ती वाहन के लिए ज्यादातर थानों को अभी भी प्राइवेट चालकों पर भरोसा करना पड़ता है। इसके अलावा जैप, एसआइआरबी और एसआइएसएफ में कुल 328 चालकों की पोस्टिंग की गई है।
कई थानों में प्राइवेट चालक पर निर्भरता:
धुर्वा थाना में तीन वाहन हैं, जिनमें दो प्राइवेट चालक हैं।
जगन्नाथपुर में तीन वाहन हैं, जिनमें एक प्राइवेट चालक है।
एयरपोर्ट थाना में दो वाहन हैं, वहां भी एक प्राइवेट चालक।
डोरंडा थाना में चार वाहन हैं, जिसमें दो प्राइवेट चालक हैं।
अरगोड़ा में चार वाहन हैं, एक प्राइवेट चालक है।
सुखदेवनगर, कोतवाली, लोअर बाजार और सदर थाने में चार-चार वाहन हैं, जिनमें दो-दो प्राइवेट चालक काम कर रहे हैं।
बरियातू में पुराने वाहन जर्जर होने की वजह से नए वाहनों से गश्ती हो रही है, और दोनों वाहन प्राइवेट चालकों पर हैं।
चुटिया, डेली मार्केट, गोंडा और लालपुर में भी गश्ती वाहन प्राइवेट चालकों के भरोसे चल रहे हैं।
जिले में 30 पीसीआर और 15 हाइवे पेट्रोलिंग वाहन हैं, यानी कुल 45 वाहन। इन वाहनों में दो शिफ्ट में काम होता है और हर वाहन में दो सरकारी चालक तैनात हैं, यानी कुल 90 चालक 24 घंटे गश्ती में लगे रहते हैं। हाइवे पेट्रोलिंग मुख्य रूप से एनएच और रिंग रोड पर तैनात रहती है। अगस्त 2025 में डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिया था कि थाने और ओपी में प्राइवेट चालक और मुंशी न रखें। उनका कहना था कि प्राइवेट कर्मचारी होने से गोपनीयता का उल्लंघन होने की संभावना रहती है। थाने और ओपी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे जाते हैं, जिससे न केवल राज्य बल्कि देश की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
