जीतेंद्र कुमार
साहब लगातार सड़क बनवाने का ही काम कर रहे हैं। पिछले कई वर्षों से वह राज्य की सड़कों को दुरुस्त और चिकना करारहे हैं। राजा की कृपा इतनी है कि सड़क के साथ शहरों के विकास की भी जिम्मेदारी उन पर ही डाल दी गयी है। इस कारण कृपा पात्रों में उनकी शीर्ष पर गिनती होती है। दूसरे अधिकारी उन्हें मिले हुए विशेष अनुदान से परेशान भी रहते हैं। लेकिन सिस्टम को समझने वाले साहब का कोई भला क्या बाल बांका कर सकता है। लेकिन पिछले दिनों उस समय बैठक में बैठे अधिकारी, इंजीनियर और कर्मचारी भौंचक रह गए जब राज्य के सबसे बड़े माननीय भड़क उठे। नया सराय ओवर ब्रिज व अन्य सड़कों को लेकर आपे से बाहर हो उठे।

माननीय इतने गरम हो उठे कि बड़े साहब की ओर इशारा करते हुए ऊंची आवाज में बोलने लगे। कहने लगे-सबको कमर में रस्सा लगा कर जेल भेज देंगे। इंजीनियर, ठेकेदार, सबको। यह देख सबके होश उड़ गए। क्योंकि माननीय समीक्षा के दौरान अमूमन बहुत कूल कूल रहा करते हैं। अधिकारियों को ऊंची आवाज में फटकार, उनके स्वभाव में ही नहीं बताया जाता है। माननीय को जानने वाले बताते भी हैं। वह डांट और फटकार में विश्वास नहीं करते। वे चुप चुप रह कर निर्णय लेने में ज्यादा भरोसा करते हैं।

इस फटकार के बाद ब्यूरोक्रेसी में एक साथ तरह तरह की चर्चा शुरू हो गयी है। कहा जाने लगा है कि क्या साहब का समय जाने वाला है। क्योंकि पिछले एक महीने से विभागों में बदलाव की चर्चा हो रही है। होमवर्क जारी है। कभी कभी, किसी भी समय बदलाव को अंजाम दिये जाने की बात कही जाने लगती है। अब बड़े साहब एक ही विभाग में बरसों से जमें हैं। इस कारण चिंता तो स्वाभाविक है। लेकिन उनकी काबिलियत को जानने वाले समझते हैं। यह सिर्फ फटकार है जो कोई दूसरा आकार लेने वाला नहीं है।
