महेंद्र सिंह आज जिंदा होते तो 70 साल के होते। वे बगोदर से तीन बार विधायक रहे।
पीएम नरेंद्र मोदी ने (PM Narendra Modi) दिवंगत शायर मुनव्वर राना (Munawwar Rana) को श्रद्धांजलि दी है और उनको य़ाद करते हुए कहा है कि उन्होंने उर्दू साहित्य औऱ शायरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
द फॉलोअप लोकसभा विशेष में आज कहानी उस दुमका लोकसभा सीट की जो झारखंड मुक्ति मोर्चा का अभेद्य किला रहा है।
झारखंड, राज्य कम दामिनी फिल्म का सेट ज्यादा लगता है। झारखंड में भले ही दामिनी फिल्म की तरह कोर्ट रूम ड्रामा नहीं है लेकिन तारीख पर तारीख जरूर मिलती है।
गोड्डा में अभी बीजेपी के निशिकांत दुबे सांसद हैं। 2024 में भी वही बीजेपी के प्रत्याशी होंगे। इसकी प्रबल संभावना है। वहीं, गठबंधन की ओर से फिलहाल एक अनार 100 बीमार वाली स्थिति है।
झारखंड मेरे दिल में है। मैं दुनिया के किसी भी कौने में रहू मुझे झारखंड और जमशेदपुर की चिंता हमेशा रहेगी। इस जगह ने मुझे पहचान दी है। यहां की जनता ने 5 साल जो प्यार, सहयोग दिया है। उसके लिए मैं इनका सदैव अभारी रहूंगा।
तस्वीर में दिख रही महिला सुशीला सामद हैं। देश की पहली महिला आदिवासी विदुषी, कवि, पत्रकार और संपादक। सुशीला सामद ने 100 साल पहले औपनिवेशिक शासनकाल में नारी चेतना की आवाज बुलंद की। उन्होंने महिला अधिकारों की बात की।
गांव में साहूकारों ने उनकी जमीन हड़प ली। घर के मवेशी तक नहीं बचे। 2 वक्त की रोटी का कोई ठिकाना नहीं था। एक परिवार विस्थापित होकर गांव से 70-80 किलोमीटर दूर रांची आ जाता है। फिर शुरू होती है संघर्ष की ऐसी कहानी जो सिर्फ इस परिवार की न होकर झारखंड के हजारों
इस तस्वीर को गौर से देखिए। ये सुमराय टेटे हैं। चेहरे पर जो हल्की सी मुस्कान है उसमें खुशी के साथ जिंदगी में कुछ कर गुजरने का जज्बा है। इस तस्वीर के अंदर कामयाबी के जितने किस्से सिमटे हुए हैं उससे कहीं ज्यादा संघर्ष की दास्तानें हैं।
स्क्रीन पर दिखाई दे रही इस लड़की को पहचानना बहुत मुश्किल नहीं है। ये दुनिया की नंबर वन तीरंदाज दीपिका कुमारी हैं जिन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री जैसे सम्मान से नवाजा जा चुका है। जरा रुकिये, अभी दीपिका का परिचय पूरा नहीं हुआ है।
भारतीय महिला हॉकी की नई सनसनी सलीमा टेटे को इसी वर्ष एशियाई हॉकी महासंघ ने एशिया महादेश का एथलेटिक्स एंबेस्डर बनाया है। किसने सोचा था कि झारखंड के एक छोटे से गांव की रहने वाली किसान की बेटी कभी इस मुकाम तक पहुंचेगी।
दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट पर खड़ी यह सांवली लड़की किसी पहचान की मोहताज नहीं है। नाम है विनीता सोरेन। झारखंड की विनीता सोरेन माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली देश की पहली आदिवासी महिला हैं। 26 जून 2012 को महज 25 साल की उम्र में एवरेस्ट फतह करन