द फॉलोअप डेस्क
भले ही बिहार विधानसभा चुनाव की राजनीति में सीएम पद के लिए आज NDA और इंडिया महागठबंधन में विवाद हो रहा हो, लेकिन एक समय ऐसा था जब बिहार की राजनीति में पहली बार कोई महिला मुख्यमंत्री बनी थी। वह भी वो महिला जिसने कभी राजनीति का स्वाद ही नहीं चखा था। जिसने न कभी कोई सीट जीती थी और न ही किसी सीट से खड़ी हुई थी। .jpeg)
हम बात कर रहे हैं लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी के बारे में, जी हाँ। जब राबड़ी देवी पहली बार 25 जुलाई 1997 को बिहार की मुख्यमंत्री बनी थीं, तब वह किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) की सदस्य नहीं थीं। और उनकी नियुक्ति उस समय हुई जब लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया जाना था, और उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।.jpg)
बिना सदस्य के मुख्यमंत्री कैसे बनी राबड़ी
दरअसल भारतीय संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो सदन का सदस्य नहीं है, वह भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकता है, लेकिन उसे शपथ लेने के छह महीने के अंदर किसी भी सदन या तो विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। और राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इस नियम को पूरा करने के लिए विधान परिषद के सदस्य के रूप में नामित होकर सदन में प्रवेश किया था।
इसके बाद राबड़ी देवी पहली बार विधायक 2005 के विधानसभा चुनाव में बनीं, जब उन्होंने राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीता था। लेकिन वे इस दौरान मुख्यमंत्री नहीं बन पायी थी क्योंकि उस समय किसी भी पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल नहीं किया था जिससे बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। इसके बाद उसी साल अक्टूबर-नवंबर में दोबारा चुनाव कराए गए और सरकार आई नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA गठबंधन वाली। 
चारा घोटाला मामला क्या था, कैसे मिला राबड़ी को मौका
दरअसल चारा घोटाला बिहार में 1990 के दशक का एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला था, जो पशुपालन विभाग में किया गया था। इस घोटाले में फर्जी बिलों के ज़रिए पशुओं के चारा और दवाइयों के नाम पर सरकारी खजाने से लगभग 950 करोड़ रुपए की अवैध निकासी की गई थी। और यह आरोप उस समय मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव पर भी लगे थे। जब CBI ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया और लगभग उनका जेल जाना तय हो गया, तो लालू यादव के सामने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति पैदा हो गई।
लालू यादव किसी और नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपकर पार्टी का नियंत्रण नहीं खोना चाहते थे। इसलिए, उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेल दिया। और 25 जुलाई 1997 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले, उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को विधायक दल का नेता घोषित कर दिया। राबड़ी देवी, जो तब तक एक गृहिणी थीं और जिसने राजनीति में कभी कदम नहीं रखा था, जो राजनीति का कोई अनुभव नहीं रखती थीं, उन्होंने तुरंत मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इस तरह से लालू यादव ने अपनी गिरफ्तारी के बावजूद सत्ता को अपने परिवार में सौंप कर सरकार और पार्टी को सुरक्षित रख लिया था। .jpeg)
2005 में बदली सरकार
लेकिन फिर जनता ने बदलाव चाही और मार्च 2005 में दोबारा से चुनाव हुए, लेकिन कोई भी पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर सकी। जिसके बाद उसी साल अक्टूबर-नवंबर में दोबारा चुनाव हुए और सरकार बदल गई। उसके बाद सत्ता में जैसे गठबंधन के जुड़ने और टूटने के सिलसिला चल पड़ा। लेकिन मुख्यमंत्री केवल एक नीतीश कुमार।