द फॉलोअप डेस्क
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में चल रहा कलह अब खुलकर सामने आ गया है, जिसके बाद अब राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा भूचाल खड़ा हो गया है। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा 15 नवंबर को राजनीति और परिवार से संबंध तोड़ने की घोषणा के बाद, अब उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव का गुस्सा भड़क उठा है।.jpeg)
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर किए गए अपने भावनात्मक पोस्ट में कहा था कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हैं। उन्होंने खुलकर पार्टी के रणनीतिकार संजय यादव पर यह सब करने का दबाव डालने का गंभीर आरोप लगाया था। इस पोस्ट के बाद लालू परिवार के अंदरूनी विवाद की खबरें और भी तेज हो गईं।
अपनी बहन पर लगाए गए आरोपों और हुए कथित अपमान से नाराज तेज प्रताप यादव ने तुरंत एक कड़ी चेतावनी जारी कर दी। तेज प्रताप ने रोहिणी का खुलकर समर्थन किया और अपमान करने वालों पर गुस्सा निकाला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा: "हमारी बहन का जो अपमान करेगा...कृष्ण का सुदर्शन चक्र चलेगा।"
तेज प्रताप यादव का यह बयान न सिर्फ उनके परिवार के सदस्यों को, बल्कि राजद के अंदरूनी लोगों को भी एक सीधी चेतावनी देता दिख रहा है। उनका 'सुदर्शन चक्र' चलाने का बयान यह दिखाता है कि वह अपनी बहन के आत्मसम्मान और रक्षा के लिए हमेशा साथ खड़े रहेंगे, भले ही इस विवाद के पीछे उनके खुद के परिवार या पार्टी के ही सदस्य शामिल क्यों ने हों।
हालांकि लालू परिवार में यह विवाद काफी समय से चल रहा है, तेज प्रताप पहले ही पार्टी और परिवार से निष्काषित किये जा चुके हैं। लेकिन रोहिणी आचार्य के हालिया पोस्ट ने इसे और भी गहरा कर दिया है। उन्होंने परिवार और राजनीति छोड़ने का ऐलान करने के बाद आज एक पोस्ट में अपने पिता को किडनी दान करने के फैसले पर 'गंदी किडनी' लगवाने और करोड़ों रुपये या टिकट लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने का जिक्र किया था। इसके अलावा उन्होंने अपने साथ हुए अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज का भी उल्लेख किया था, जो कि अब बिहार की राजनीतिक गालियारों में काफी चर्चा का विषय बन गया है।.jpg)
लोगों को कहते देखा जा रहा है कि लालू और तेजस्वी पार्टी के साथ परिवार भी खो रहे हैं। दरअसल लोग ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस बार हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राजद मात्र 25 सीटें ही ला पायी है। कुल मिलाकर बिहार में राजद के नेतृत्व वाली महागठबंधन 50 सीटें भी नहीं ला पायीं हैं। जिससे राजद की संगठनात्मक राजनीतिक सफ़र पर भी खतरा मंडराता दिख रहा है। और इस करारी हार के बाद रोहिणी ने राजनीति और परिवार छोड़ने को लेकर एक ट्वीट किया था। जिसके बाद तेजप्रताप ने भी उनका समर्थन किया । 
आपको बता दें कि NDA ने इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में 243 में से 202 सीटें जीत लीं, जबकि महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। इस परिणाम के बाद संजय यादव निशाने पर आ गए। इससे पहले भी रोहिणी आचार्य ने इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की थी। रोहिणी ने 18 सितंबर को एक फेसबुक पोस्ट साझा किया था, जिसमें उन्होंने संजय यादव के खिलाफ टिप्पणी की थी। जो कि पार्टी और और परिवार में हो रहे कलह को खुलकर उजागर करता है। देखा जाए तो तेजस्वी यादव को इस बार के चुनाव में पार्टी से लेकर परिवार में काफी नुकसान उठाना पड़ा है।