द फॉलोअप डेस्क
बिहार स्थित पटना जिला के सात प्रखंडों में जुलाई से नए डिग्री कॉलेज शुरू होने हैं। बताते चलें कि इसकी जानकारी डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने कल बुधवार को उन्नत शिक्षा उज्ज्वल भविष्य कार्यक्रम की समीक्षा में दिए हैं। बिहार सरकार का यह कदम राज्य के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर लेकर आया है। डॉ. त्यागराजन का कहना है कि राज्य में इन कॉलेजों से उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ेगी, और अब बच्चों को पढ़ाई करने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। डॉ. त्यागराजन कहते हैं कि यह पहल शिक्षा की असमानता को दूर कर ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक माहौल सुधारेगी। वहीं, सात निश्चय-3 के चौथे संकल्प के तहत उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, पटना जिला के 23 प्रखंडों में से सात में अभी तक कोई भी अंगीभूत या संबद्ध डिग्री कॉलेज नहीं है। सरकार ने इन प्रखंडों में कॉलेज खोलकर शिक्षा की असमानता दूर करने का निर्णय लिया है।
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बताते चलें कि जिस प्रखंड में डिग्री कॉलेज खुलना तय हुआ है उसका नाम अथमलगोला, बेलछी, दनियावां, घोसवरी, खुसरूपुर, मनेर और संपतचक प्रखंड शामिल है।
डॉ. त्यागराजन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते थे। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रथम चरण में इन सात प्रखंडों का चयन किया गया है। वहीं, प्रशासन का लक्ष्य है कि जुलाई से इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। डीएम ने अनुमंडल पदाधिकारियों, जिला शिक्षा पदाधिकारी और अंचल अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार के आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। कॉलेज स्थापना के लिए भवन, भूमि और अन्य संसाधनों की उपलब्धता पर तेजी से काम करने को कहा गया है।

जानकारी के अनुसार, समीक्षा बैठक में समयबद्ध कार्रवाई पर विशेष बल दिया गया। प्रशासन चाहता है कि सत्र शुरू होने से पहले सभी तैयारियां पूरी हो जाएं। वहीं सरकार का मानना है कि बच्चों को अपने घर के नजदीक ही डिग्री कॉलेज मिलेंगे तो उनका ऑटो भाड़ा भी बचेगा साथ ही घर पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचेगा। वहीं, इस कदम से रोजगारोन्मुख और वोकेशनल शिक्षा से युवाओं को नए अवसर मिलेंगे। इससे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा भी बढ़ावा मिलेगा। गौरतलब है कि जिले के 23 में से 16 प्रखंडों में ही फिलहाल डिग्री कॉलेजों की सुविधा उपलब्ध है। सात नए कॉलेज खुलने से सभी प्रखंडों में संतुलित और शैक्षणिक व्यवस्था स्थापित होगी। छात्र-छात्राएं अपने क्षेत्र में ही स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। इससे रोजगार, करियर विकास और जीवनस्तर में सुधार होगा।