द फॉलोअप डेस्क:
बिहार विधान परिषद (Bihar legislative council) के पटना (Patna) शिक्षक निर्वाचन (Teachers Electoral) क्षेत्र में शुक्रवार को होने वाले मतदान से पहले मतदाता सूची को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पटना विश्वविद्यालय (Patna University) के पटना साइंस कॉलेज (Patna Science College) की मतदाता सूची में पांच ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनके कॉलेज में शिक्षक के तौर पर कार्यरत होने पर प्रशासन ने सवाल उठाए हैं। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, राकेश रंजन, तरुण कुमार, कौशलेंद्र, विकास कुमार और शिव शंकर के नाम सूची में दर्ज हैं, जबकि ये पांचों कॉलेज में शिक्षक के रूप में कार्यरत नहीं हैं। वहीं, कॉलेज के तीन वास्तविक शिक्षकों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए। मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रशासन ने निर्वाचन आयोग को शिकायत भेजी है। हालांकि, इस संबंध में जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट पर कई कॉलेजों में सवाल
पटना साइंस कॉलेज के अलावा पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अन्य संस्थानों को लेकर भी गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फतुहा के संत कबीर महंत विद्यानंद आयुर्वेद फार्मेसी कॉलेज और आरपीआरकेडी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की मतदाता सूची में भी अनियमितताओं की शिकायत की गई है। बताया गया है कि संत कबीर महंत विद्यानंद कॉलेज में 17 शिक्षक हैं, जबकि मतदाता सूची में 33 शिक्षकों के नाम दर्ज हैं। वहीं, एसटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन से जुड़े अलग-अलग कॉलेजों के नाम पर करीब 48 मतदाता बनाए जाने का दावा किया गया है। इन मामलों की जांच के लिए जिला प्रशासन की ओर से विशेष टीम भी गठित की गई थी। टीम ने 4 जून और 21 जून को संबंधित कॉलेजों का भौतिक सत्यापन करने का प्रयास किया, लेकिन दोनों बार संस्थान बंद मिले।

अस्तित्वहीन कॉलेज के नाम पर भी मतदाता बनाने का आरोप
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में ऐसे संस्थानों के नाम पर भी मतदाता दर्ज होने का आरोप है, जिनके अस्तित्व और मान्यता पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सिद्धार्थ महिला कॉलेज को पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध बताया गया है, लेकिन विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इस नाम से कॉलेज का पंजीकरण नहीं मिलने का दावा किया गया है। इस संस्थान के नाम पर करीब 46 मतदाता दर्ज बताए जा रहे हैं। इसी तरह, नौबतपुर के जगतारण कुंवर प्राइवेट आईटीआई के नाम पर 20 मतदाता बनाए जाने की बात सामने आई है, जबकि आरोप है कि इनमें से कोई भी संस्थान में शिक्षक के रूप में कार्यरत नहीं है। इन शिकायतों के बाद मतदाता सूची की सत्यता और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। अब मामले में निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन की जांच तथा आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।