द फॉलोअप डेस्क:
Maithili Thakur: बिहार (Bihar) की राजनीति में जातिगत समीकरणों को लेकर बीजेपी विधायक और लोक गायिका मैथिली ठाकुर का बयान चर्चा में है। दरभंगा (Darbhanga) के अलीनगर (Alinagar) से विधायक मैथिली ठाकुर ने कहा कि जमीनी स्तर पर राजनीति करते हुए जातीय संतुलन का ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने बताया कि प्रखंड स्तर पर टीम बनाने के दौरान भी अलग-अलग जातियों और समुदायों के लोगों को शामिल करना जरूरी हो जाता है, ताकि सभी को प्रतिनिधित्व का एहसास हो। मैथिली के मुताबिक, वह जातिवाद में विश्वास नहीं करतीं, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में लोगों को जोड़ने के लिए जातिगत समीकरणों को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
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जातीय संतुलन के बिना टीम बनाना मुश्किल
एक बातचीत के दौरान मैथिली ठाकुर ने बताया कि पहले वह मानती थीं कि बिहार से जातिगत राजनीति खत्म होनी चाहिए, लेकिन राजनीति में आने के बाद उन्हें इसकी जमीनी हकीकत समझ में आई। उन्होंने कहा कि अगर जाति को पूरी तरह हटा दिया जाए, तो मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में काम करना मुश्किल हो जाएगा। एक छोटे से प्रखंड की टीम बनाने में भी उन्हें यह देखना पड़ता है कि किस समुदाय के कितने लोग शामिल हैं। उनके अनुसार, केवल योग्यता के आधार पर लोगों को चुनने पर भी पक्षपात के आरोप लग सकते हैं। ऐसे में सभी वर्गों को साथ लेकर चलना और उन्हें प्रतिनिधित्व देना उनकी राजनीतिक मजबूरी बन जाती है।
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जातिगत राजनीति से दुखी भी हैं मैथिली ठाकुर
मैथिली ठाकुर ने साफ किया कि सभी जातियों को साथ लेकर चलना उनकी दीर्घकालिक रणनीति नहीं, बल्कि फिलहाल लोगों को जोड़ने का एक तरीका है। उन्होंने एक 17 वर्षीय लापता महादलित लड़के का जिक्र करते हुए बताया कि विधायक के तौर पर उन्होंने उसकी मदद के लिए हर संभव प्रयास किया था। इसके बावजूद कुछ लोगों ने पीड़ित परिवार के पास जाकर उनकी जाति को लेकर सवाल उठाए। मैथिली ने कहा कि इस तरह की बातें उन्हें दुख पहुंचाती हैं, क्योंकि वह बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों की मदद करना चाहती हैं। उनके बयान से बिहार की राजनीति में जातिगत प्रतिनिधित्व और योग्यता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती एक बार फिर सामने आई है।