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50 हजार का कर्ज बना मुसीबत, किस्त के दबाव में दरभंगा के कई परिवारों का पलायन

50 हजार का कर्ज बना मुसीबत, किस्त के दबाव में दरभंगा के कई परिवारों का पलायन

द फॉलोअप डेस्क:

बिहार (Bihar) के दरभंगा जिले (Darbhanga District) के कुशेश्वरस्थान (Kusheshwarsthan) में निजी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों (Micro Finance Companies) से लिया गया कर्ज अब ग्रामीण परिवारों (Rural Famlies) के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। छोटे-मोटे रोजगार के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद में लोगों ने कर्ज लिया था, लेकिन नियमित आमदनी नहीं होने के कारण अब इसकी किस्त चुकाना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि साप्ताहिक और पाक्षिक किस्त जमा करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। तकादे से परेशान कई परिवार अपने घरों में ताला लगाकर गांव छोड़ रहे हैं। कुशेश्वरस्थान पूर्वी और पश्चिमी प्रखंड के कई गांवों में सामने आ रहे इन मामलों ने माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ऋण वसूली प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि इलाके में एक दर्जन से अधिक निजी माइक्रो फाइनेंस कंपनियां और वित्तीय संस्थान सक्रिय हैं।

50 से 75 हजार का कर्ज, फिर बढ़ता गया बोझ

ग्रामीणों के मुताबिक, आधार और पैन कार्ड के आधार पर लोगों को 50 हजार से 75 हजार रुपये तक का कर्ज आसानी से मिल जाता है। लेकिन, स्थायी रोजगार और नियमित आमदनी नहीं होने के कारण परिवार समय पर किस्त जमा नहीं कर पाते। ऐसे में एक कंपनी की किस्त चुकाने के लिए दूसरी कंपनी से कर्ज लेने का सिलसिला शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे परिवार कई कंपनियों के कर्ज में फंस जाते हैं। दूसरी ओर, रोजगार की तलाश में पुरुषों के दूसरे राज्यों में रहने के कारण घर पर मौजूद महिलाओं पर किस्त जमा करने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार होने वाले तकादे और दबाव से महिलाएं भी परेशान हैं।

कई गांवों से दर्जनों परिवारों के पलायन का दावा

ग्रामीणों ने कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के बुढ़िया सुकराती गांव से करीब 20 परिवारों के पलायन का दावा किया है। वहीं, केवटगामा गांव से करीब 50 और छोटकी कोनिया से छह परिवारों के गांव छोड़ने की बात कही जा रही है। इसके अलावा कुशेश्वरस्थान प्रखंड के बड़गांव और बलहा से भी करीब छह परिवारों के पलायन का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों और पलायन के पीछे कर्ज वसूली को मुख्य कारण मानने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

रीना देवी की मौत को भी कर्ज के दबाव से जोड़ रहे ग्रामीण

मधुबन गांव की रहने वाली 45 वर्षीय रीना देवी की दो मार्च 2025 को हुई मौत को भी ग्रामीण कर्ज के दबाव से जोड़कर देख रहे हैं। उनके स्वजन और ग्रामीणों का आरोप है कि कई माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की किस्त जमा करने की तारीख नजदीक थी और उनके पास पैसे का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। इस वजह से वह तनाव में थीं। हालांकि, रीना देवी की मौत में कर्ज वसूली की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासन को नहीं मिली पलायन की सूचना

इस मामले में प्रखंड जीविका के प्रखंड समन्वयक संजीव कुमार ने बताया कि निजी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कामकाज पर जीविका समूह का नियंत्रण नहीं है। वहीं, बीडीओ चंदन कुमार और थानाध्यक्ष गौरव प्रसाद ने कहा कि ऋण की किस्त के तकादे से परेशान होकर किसी परिवार के पलायन करने की सूचना उन्हें नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई जानकारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत भी बताई।

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