द फॉलोअप डेस्क:
बिहार (Bihar) में चक्रवाती तूफान (Cyclone) अर्नब के प्रभाव से पिछले तीन दिनों से कई जिलों में बारिश हो रही है। कहीं झमाझम तो कहीं हल्की और मध्यम बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। तेज हवाओं और बारिश से खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अब राज्य में तूफान का असर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक, शनिवार को पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सारण और सीवान समेत कई जिलों में बारिश की संभावना है। इस दौरान मेघगर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। फिलहाल भारी बारिश की आशंका नहीं है। रविवार, 1 नवंबर को भी मौसम का मिजाज बदला रह सकता है, जबकि 2 नवंबर से मौसम सामान्य होने के आसार हैं।

पटना में तापमान गिरा, अस्पतालों में बढ़े मरीज
बारिश और तेज हवाओं के कारण पटना समेत बिहार के कई जिलों में ठंड का एहसास बढ़ गया है। राजधानी पटना में सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए हैं। पिछले दो दिनों में अधिकतम तापमान में चार से दस डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पिछले 36 घंटों में पटना में 32 मिलीमीटर बारिश हुई है। बारिश के कारण सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात भी प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, मौसम में अचानक बदलाव का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। पीएमसीएच, आईजीआईएमएस, न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल, एनएमसीएच और एम्स पटना में पिछले दो दिनों के दौरान इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में 50 से 60 प्रतिशत तक वृद्धि होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में लोगों को सुबह और शाम गर्म कपड़े पहनने तथा बारिश में भीगने से बचने की सलाह दी गई है।

स्वाति नक्षत्र की बारिश से धान की फसल को नुकसान
अर्नब तूफान के कारण हो रही बारिश किसानों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, हथिया नक्षत्र तक होने वाली बारिश धान की फसल के लिए फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि इस दौरान फसल को पानी की जरूरत होती है। लेकिन स्वाति नक्षत्र में धान की बालियां निकलने और फसल पकने की अवस्था में बारिश और तेज हवा नुकसान पहुंचा सकती है। खासकर 130 दिनों में तैयार होने वाली धान की किस्मों की कटाई शुरू होने के समय और 150 से 155 दिनों में पकने वाली नाटी मंसूरी जैसी किस्मों में बालियां भारी होने पर तेज हवा से फसल गिर सकती है। इससे धान के दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने, दाने काले पड़ने और बाजार में कीमत कम मिलने का खतरा रहता है। ऐसे में किसानों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और फसल की कटाई व रखरखाव को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।