Bihar Education:
बिहार में कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अब राजस्थान मॉडल अपनाने की घोषणा की है। शिक्षा विभाग की ओर से तैयार की जा रही इस नीति में फीस, पढ़ाई के घंटे, टेस्ट सिस्टम और छात्रों की सुविधाओं को लेकर कई नए प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत कोचिंग संस्थानों की निगरानी के लिए एक नियंत्रण एवं विनियमन प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर 2 से 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

एक साथ पूरे साल की फीस लेने पर लग सकती है रोक
बिहार सरकार इस पॉलिसी को तैयार करने के लिए राजस्थान की कोचिंग नीति का अध्ययन कर रही है। नई पॉलिसी में कोचिंग संस्थानों की ओर से छात्रों से एकमुश्त पूरे साल की फीस वसूलने की व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। संस्थानों को छात्रों को किस्तों में फीस जमा करने का विकल्प देना होगा। इसके अलावा कोर्स के बीच में फीस बढ़ाने पर भी रोक लगाने का प्रावधान किया जा सकता है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को ऑथोरिटी के पास शपथ पत्र जमा करना होगा। अगर कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ता है तो संस्थान को बची हुई फीस, हॉस्टल और मेस शुल्क वापस करने की व्यवस्था करनी होगी।
5 घंटे से अधिक क्लाश पर भी लगेगी रोक
छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए नई नीति में पढ़ाई के समय को सीमित करने का प्रस्ताव है। इसके तहत कोचिंग संस्थान एक दिन में अधिकतम 5 घंटे तक ही कक्षाएं संचालित कर सकेंगे। इसके अलावा छात्रों और शिक्षकों के लिए सप्ताह में एक दिन छुट्टी अनिवार्य करने का प्रावधान भी शामिल किया जा सकता है। छुट्टी के अगले दिन टेस्ट या परीक्षा आयोजित करने पर भी रोक लगाई जा सकती है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हर कोचिंग संस्थान में प्रोफेशनल साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। वहीं, छात्रों की क्षमता के आधार पर अलग-अलग विशेष बैच बनाने पर भी रोक लगाने की तैयारी है।

शहरों के बाहर शिफ्ट हो सकते हैं कोचिंग संस्थान
पटना में चर्चित कोचिंग विवाद के बाद सरकार अब शहरों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए राज्य के सभी कोचिंग संस्थानों को शहर से बाहर शिफ्ट कराने पर भी विचार कर रही है। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, क्लासरूम में प्रत्येक छात्र के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। साथ ही राज्य के सभी छोटे-बड़े कोचिंग संस्थानों का सरकारी स्तर पर रजिस्ट्रेशन भी जरूरी किया जा सकता है। हालांकि, नई कोचिंग पॉलिसी के अंतिम प्रावधान सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।