द फॉलोअप डेस्क
बिहार में पराली जलाने वाले किसानों पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। राज्य में पराली जलाने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया गया है। बिहार विधानसभा में कृषि विभाग द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में वर्ष 2025-26 में पराली जलाने के कारण 1,807 किसानों का DBT रजिस्ट्रेशन रोक दिया गया है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की एडवाइजरी का उल्लंघन करने पर वर्ष 2025 में किसानों की सब्सिडी और इंसेंटिव रोक दिए गए थे वहीं, इस साल अब तक 49 और किसानों के DBT रजिस्ट्रेशन रोक दिए गए हैं।

बताते चलें कि DBT के जरिए किसानों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे खाते में मिलता है। अब रजिस्ट्रेशन रुकने से वे इन लाभों से वंचित हो जाएंगे। गौरतलब है कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि पराली जलाने पर पूरी तरह रोक है। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। खेतों में फसल के अवशेष जालने की मनाही है। वहीं, सरकार ने पहले ही चेतावनी दी थी कि नियम तोड़ने पर सब्सिडी और वित्तीय मदद बंद कर दी जाएगी। इसके बावजूद भी किसानों द्वारा पराली जलाया गया। देवेंद्र कुमार शुक्ला ने बताया कि राज्य, किसानों को रियायती बिजली, डीजल और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी देता है।
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लेकिन नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। वहीं, सरकार किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक भी कर रही है। खेती के उपकरणों पर सब्सिडी दी जा रही है। बायोमास ब्रिकेट बनाने के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हाल ही में पेश बिहार इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में बताया गया कि साल 2024 में 4,596 किसानों का DBT रजिस्ट्रेशन रोका गया था। हालांकि, वर्ष 2025 में पराली जलाने की घटनाओं में कुछ कमी आई है। जिला अधिकारियों को हॉटस्पॉट पंचायतों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि पर्यावरण और लोगों की सेहत की रक्षा सबसे जरूरी है।