द फॉलोअप डेस्क
बिहार में अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल अब बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन गई है। बुधवार को हड़ताल के तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में अधिकारी अपने काम पर नहीं लौटे, जिससे राज्य के आधे से अधिक अंचल कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप हो गया। जमीन से जुड़े मामलों और प्रमाणपत्र सेवाओं के प्रभावित होने से आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग ने बिहार राजस्व सेवा संवर्ग के अंतर्गत कार्यरत अधिकारियों की उपस्थिति को लेकर जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय, भू-अर्जन निदेशालय, चकबंदी निदेशालय के निदेशकों के साथ-साथ सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को आधिकारिक पत्र भेजा गया है। सरकार ने निर्देश दिया है कि 9 मार्च से शुरू हुई हड़ताल के दौरान कितने अधिकारी अपने कार्यस्थल पर मौजूद रहे और कितने हड़ताल में शामिल हुए, इसकी पूरी जानकारी निर्धारित प्रपत्र में भेजी जाए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि 2 फरवरी से अब तक किन-किन अंचलों में कामकाज प्रभावित रहा है।

इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की रणनीति तय करेगी और जरूरत पड़ने पर हड़ताल में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसी बीच प्रशासनिक सख्ती का संकेत तब भी मिला जब बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार राजस्व सेवा के पांच अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। जिलाधिकारियों की अनुशंसा के आधार पर इन अधिकारियों के त्यागपत्र को उनकी आवेदन तिथि से प्रभावी मानते हुए मंजूरी दी गई है। जिन अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं उनमें वैशाली के गोरौल के तत्कालीन अंचलाधिकारी अंशु कुमार, रोहतास के बिक्रमगंज के राजस्व अधिकारी राजन कुमार, सारण जिले के परसा की राजस्व अधिकारी शिवांगी पांडेय, रोहतास के राजपुर की अंचलाधिकारी अंकिता वर्मा और हाजीपुर सदर की राजस्व अधिकारी स्मृति कुमारी शामिल हैं। इससे पहले विभाग के 100 दिन पूरे होने पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताल पर गए अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ड्यूटी से अनुपस्थित अधिकारियों के दिनों की गणना की जा रही है। यदि कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता है तो उसके खिलाफ सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का साफ संदेश है कि यदि सरकारी सेवा में रहना है तो जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा, अन्यथा प्रशासन सख्त कदम उठाने के लिए तैयार है।