द फॉलोअप डेस्क
बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में CO और राजस्व कर्मियों का हड़ताल के कारण जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो गए हैं। राज्य के कई जिलों में दाखिल-खारिज, जमीन म्यूटेशन, लगान रसीद, आय, जाति और आवासीय प्रमाण पत्र जैसे जरूरी काम ठप पड़ गए हैं। इसके चलते आम लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई जगहों पर लोग अंचल कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने के कारण काम नहीं हो पा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार राजस्व सेवा के अधिकारियों और कर्मियों ने अपने अधिकारों की रक्षा और लंबित मांगों को लेकर 2 फरवरी से हड़ताल शुरू की थी। हड़ताल के कारण कई अंचल कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप हो गया है, जिससे जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा रुक गया है और कई सरकारी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो रही हैं। हड़ताल के बाद सरकार और राजस्व कर्मियों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई थी। इस दौरान मामले की जांच और समाधान के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। इसके बाद हड़ताल वापस लेने की बात भी सामने आई थी, लेकिन कई जगहों से अब भी अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मियों के हड़ताल पर रहने की खबरें मिल रही हैं।

भूमि एवं राजस्व विभाग के DPRO राजीव कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार से जो हमारी मांग थी वो पूरा नहीं हो पाया जिसकी वजह से हमारा हड़ताल जारी है। इधर बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताली कर्मियों से जल्द काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग से जुड़े कार्य सीधे आम जनता से जुड़े होते हैं, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से जनता की परेशानियों को देखते हुए जल्द काम शुरू करने का आग्रह किया है। इस बीच विभाग ने एक प्रशासनिक निर्णय लेते हुए बिहार राजस्व सेवा के 5 अधिकारियों के त्यागपत्र भी स्वीकार कर लिए हैं। यह निर्णय जिलाधिकारियों की अनुशंसा के आधार पर लिया गया है। इनमें 3 महिला और 2 पुरुष अधिकारी शामिल हैं। इस संबंध में विभाग की ओर से औपचारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है। फिलहाल हड़ताल के कारण राज्य के कई जिलों में जमीन से जुड़े कार्य प्रभावित हैं और आम लोग अपने जरूरी कामों के लिए समाधान का इंतजार कर रहे हैं।