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अनंत सिंह के निष्कासन पर JDU में घमासान, क्या पार्टी ने अपने ही संविधान को तोड़ा?

अनंत सिंह के निष्कासन पर JDU में घमासान, क्या पार्टी ने अपने ही संविधान को तोड़ा?

द फॉलोअप डेस्क:

बिहार (Bihar) की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) को जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद पार्टी के भीतर अधिकार और अनुशासन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 24 अक्टूबर को जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की ओर से जारी आदेश में अनंत सिंह पर पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करने, वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने और विधान परिषद चुनाव में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने के आरोप लगाए गए। हालांकि, कार्रवाई के तरीके को लेकर अब पार्टी के संविधान का हवाला दिया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या प्रदेश अध्यक्ष को किसी मौजूदा विधायक को पार्टी से निष्कासित करने का अधिकार है और क्या इस फैसले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया?

पार्टी संविधान में अधिकारों की क्या है व्यवस्था?

जेडीयू के संविधान की धारा 19 में अनुशासनहीनता से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख है। इसके तहत पार्टी के फैसलों के खिलाफ काम करना, अधिकृत पदाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करना और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाना अनुशासनहीनता के दायरे में आ सकता है। वहीं, एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के संविधान में प्रदेश अध्यक्ष को किसी विधायक, सांसद या राष्ट्रीय परिषद के सदस्य को निलंबित करने का अधिकार नहीं दिया गया है। ऐसे में अनंत सिंह के मामले में प्रदेश अध्यक्ष की ओर से जारी निष्कासन आदेश पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जेडीयू से जुड़े सूत्रों का दावा है कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने राज्य इकाई को इस मामले में कार्रवाई के लिए अधिकृत किया था। इसलिए पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पार्टी के संविधान और संबंधित आदेश की पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है।

ललन सिंह और संजय झा की चुप्पी से बढ़ी चर्चा

अनंत सिंह पर कार्रवाई के बाद पार्टी के शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रियाओं को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज है। आपके दिए विवरण के मुताबिक, दिल्ली में जब केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने जवाब देने की जिम्मेदारी संजय झा पर डाल दी। वहीं, संजय झा ने अनंत सिंह के मामले पर टिप्पणी करने से परहेज किया। हालांकि, इस चुप्पी को अनंत सिंह का खौफ या पार्टी के भीतर वर्चस्व की लड़ाई मानना फिलहाल अटकल ही होगी। इस बीच, जेडीयू के आदेश में अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए बिहार विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की सिफारिश करने की बात भी कही गई है। यह मामला संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से जुड़ा है। ऐसे में पार्टी से निष्कासन और विधायक पद से अयोग्यता दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, जिनका फैसला संबंधित नियमों के तहत होगा।

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