द फॉलोअप डेस्क
थाने में आवेदन देने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं करने के मामले में चार थानेदारों को महंगा पड़ा। थाने में कोई सुनवाई नहीं होने के कारण परिवादी परेशान हो गए और निबंधित डाक से आवेदन की कॉपी भी थाने में भेजी, लेकिन फिर भी किसी प्रकार की सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद परिवादी ने जिला लोक शिकायत निवारण कोर्ट में परिवाद दायर किया।
परिवाद की सुनवाई के दौरान जब एसएचओ कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सके, तो मामले का निवारण नहीं हो सका। इसके बाद जिला लोक शिकायत निवारण कोर्ट ने चारों एसएचओ पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाने की अनुशंसा की है।
केस 1 - कार्यालय से आठ बार नोटिस भेजी गई मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज निवासी विजय सिंह ने कल्याणपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में परिवाद दायर किया। कार्यालय से आठ बार नोटिस भेजी गई, लेकिन कल्याणपुर थाने का प्रतिनिधि तीन तिथियों पर उपस्थित नहीं हुआ। आखिरकार, लोक शिकायत निवारण कार्यालय ने कल्याणपुर थानाध्यक्ष पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाने की अनुशंसा की है।
केस 2 - एसपी व डीएम को कार्रवाई के लिए दी सूचना आदापुर के यमुनापुर निवासी तारिक अनवर ने आदापुर थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। फिर उन्होंने आवेदन को स्पीड पोस्ट से भेजा, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने जिला लोक शिकायत में परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान एसएचओ आदापुर कोर्ट में अनुपस्थित रहे, जिसके बाद जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय ने एसएचओ धर्मवीर चौधरी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाने की अनुशंसा की और एसपी व डीएम को कार्रवाई के लिए सूचना दी है।
केस 3 - डुमरियाघाट थाना में अनसुनी डुमरियाघाट थाना क्षेत्र के खजुरिया गांव निवासी चन्द्रदेव चौरसिया ने एफआईआर दर्ज कराने के लिए डुमरियाघाट थाने में आवेदन दिया था। निबंधित डाक से भी आवेदन भेजा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद चन्द्रदेव चौरसिया ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में परिवाद दायर किया। डुमरियाघाट एसएचओ सुधीर कुमार पांच तिथियों पर सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए।
केस 4 - एसएचओ ने नहीं की एफआईआर दर्ज केसरिया थाने में जमीन संबंधी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। नोटिस मिलने के बावजूद एसएचओ ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में उपस्थित नहीं होकर मामले को निस्तारित करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय ने एसएचओ पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाने की अनुशंसा की और एसपी से अनुरोध किया कि एसएचओ से शोकॉज करें और तीन सप्ताह के भीतर मामले की जांच कराकर कार्रवाई करें।
इन घटनाओं के बाद पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है, जिससे थानेदारों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास हो सके और जनता की शिकायतों का उचित समाधान हो सके।