द फॉलोअप डेस्क
बिहार विधानसभा चुनाव का शंकनाद हो चुका है। दो चरणों में चुनाव होना है। इसके लिए सभी पार्टी अपनी तैयारियों में जुटी हुई है। NDA और इंडिया महागठबंधन में सीट शेयरिंग का पेंच फंसा हुआ है। लेकिन कल से यानी 10 अक्टूबर से पहले चरण में 6 नवंबर को मतदान होने के लिए उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकेंगे। कल से 17 अक्टूबर तक कुल 121 सीटों के लिए उम्मीदवार नामांकन कर सकेंगे। नामांकन का सिलसिला कल से शुरू हो जाएगा। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव की तारीखों की घोषणा के 3 दिन बाद भी अब तक NDA और महागठबंधन के बीच सीट शेयरिंग का फैसला नहीं हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार दोनों ही दल एक से दो दिनों के अंदर सीट बंटवारें पर मुहर लगा देगी। 
बता दें कि 10 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक कुल 121 सीटों के लिए उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। इन 121 सीटों में, 62 सीटों पर एनडीए का कब्जा है, जबकि 59 सीटों पर महागठबंधन का पलड़ा भारी है। इन सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया कल से शुरू हो जाएगी, और उम्मीदवार 17 अक्टूबर तक अपनी उम्मीदवारी जमा कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 18 अक्टूबर को की जाएगी, जबकि उम्मीदवार 20 अक्टूबर तक अपने नाम वापस भी ले सकेंगे। पहले चरण का प्रचार 4 नवंबर को शाम 5 बजे तक थम जाएगा, जिससे प्रत्याशियों को प्रचार के लिए कुल 15 दिन का समय मिलेगा।
हालांकि चुनाव की तारीखों का ऐलान तीन दिन पहले हो चुका है, लेकिन अब तक एनडीए और महागठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा तय नहीं हो पाया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों गठबंधन 1-2 दिनों के भीतर सीट शेयरिंग पर अंतिम फैसला ले लेंगे। एनडीए और महागठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक गणनाओं का दौर जारी है, क्योंकि प्रत्येक सीट पर उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
पहले चरण की 121 सीटों में एनडीए के पास 62 सीटों का मजबूत कब्जा है। इसमें सबसे ज्यादा सीटें बीजेपी के पास हैं। 2020 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 32 सीटों पर विजय प्राप्त की थी, इसके बाद VIP के 4 विधायक और कांग्रेस के सिद्धार्थ सौरव भी भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके अलावा, 2020 में लोजपा से जीते राजकुमार सिंह के जदयू में शामिल होने से पार्टी की संख्या में एक की बढ़ोतरी हुई। हम, रालोसोपा और चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) की इन 121 सीटों में कोई मौजूदा सीट नहीं है।
वहीं इंडिया महागठबंधन पहले चरण में होने वाले 121 सीटों के चुनाव में 59 सीट पर काबिज है। जिनमें से सबसे बड़ी पार्टी राजद है, जिसके पास 41 सीटें हैं। कांग्रेस 8 सीटों पर अपनी प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश करेगी। इसके अलावा, भाकपा (माले) की 7, सीपीआई और सीपीएम की दो-दो सीटें भी इस चरण में हैं। महागठबंधन के पास हालांकि कोई बड़ी चुनौती नहीं दिखती, लेकिन राजनीतिक संघर्ष और जातीय समीकरणों के कारण यह मुकाबला दिलचस्प होगा।
2020 के विधानसभा चुनाव में पहले चरण की कई सीटों पर एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। उदाहरण के तौर पर सहरसा में भाजपा ने राजद को हराया था, सिमरी बख्तियारपुर में राजद ने वीआईपी को मात दी, बेगूसराय में भाजपा ने कांग्रेस को हराया, आरा में भाजपा का सामना भाकपा माले से हुआ था, जबकि राघोपुर सीट पर राजद का कब्जा बरकरार रहा।
पहले चरण की 121 सीटें उत्तर बिहार और मगध क्षेत्र के विभिन्न जिलों में फैली हुई हैं, जहां जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। एनडीए जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी के विकास एजेंडे पर जोर दे रही है, वहीं महागठबंधन बेरोजगारी, महंगाई और किसान मुद्दों को लेकर जनता के बीच उतरने की तैयारी कर रहा है।
पहला चरण बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है, क्योंकि इन सीटों पर कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच होने वाली यह सियासी लड़ाई बिहार की भविष्यवाणी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कुल मिलाकर, पहले चरण का चुनाव बिहार की सियासत की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि इन 121 सीटों में कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है।