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बिहार में 52.22 लाख लोगों के राशनकार्ड से कटेंगे नाम, आधार वेरिफिकेशन बना कारण

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द फॉलोअप डेस्क
बिहार में राशन कार्ड धारकों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है, जिससे राज्य के लाखों लाभुकों को अब सस्ते या मुफ्त राशन से वंचित होना पड़ सकता है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने आधार से जुड़ी गड़बड़ियों और ई-केवाईसी (e-KYC) न होने के कारण बड़े पैमाने पर नाम हटाने की तैयारी कर ली है। सरकार के इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना और फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिहार के सभी 38 जिलों में करीब 52 लाख 22 हजार लोगों के नाम राशन कार्ड से हटाए जा सकते हैं। यह फैसला उन मामलों में लिया गया है जिनके आधार कार्ड उपलब्ध नहीं हैं या डेटा में गड़बड़ी होने के कारण उनका वेरिफिकेशन रिजेक्ट कर दिया गया है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो राज्य में अब तक 5 करोड़ 92 लाख कार्ड धारकों का आधार सत्यापन पूरा हो चुका है, लेकिन अभी भी 6 करोड़ 74 लाख पीडीएस लाभार्थियों की आधार सीडिंग लंबित है, जो विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो राजधानी पटना में सबसे बुरा हाल है, जहाँ सबसे ज्यादा 2 लाख 96 हजार लोगों का वेरिफिकेशन रिजेक्ट हुआ है। इसके अलावा दरभंगा में 2.64 लाख, वैशाली में 2.43 लाख, नालंदा में 2.29 लाख, पूर्वी चंपारण में 2.21 लाख और पश्चिम चंपारण में 2.06 लाख लोगों के नाम हटने की आशंका है। मिथिलांचल और उत्तर बिहार के अन्य जिलों जैसे मधुबनी में 1.98 लाख, मुजफ्फरपुर में 1.79 लाख और समस्तीपुर में 1.40 लाख लाभार्थियों का डेटा रिजेक्ट हुआ है।
दूसरी ओर, राहत की बात यह है कि एक बड़ी आबादी का आधार वेरिफिकेशन सही पाया गया है और उनका राशन कार्ड सुरक्षित है। सफल वेरिफिकेशन वाले प्रमुख जिलों में मुजफ्फरपुर में 30.4 लाख, पूर्वी चंपारण में 28.6 लाख, पटना में 27.3 लाख, मधुबनी में 26.9 लाख और समस्तीपुर में 25.7 लाख लाभार्थी शामिल हैं। 
 

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