जामताड़ा:
Jamtara News: नाला विधानसभा क्षेत्र की पालाजोरी पंचायत स्थित लायबनी गांव में विभागीय लापरवाही और सरकारी उदासीनता की बड़ी मिसाल सामने आई है। गांव के पास जोरिया पर लाखों रुपये की लागत से बनाया गया पुल (Bridge) वर्षों से महज शोभा की वस्तु बना हुआ है। वर्ष 2010-11 में निर्मित इस पुल का अब तक एप्रोच रोड (Approach Road) नहीं बनाया गया है और न ही कलवर्ट (Culvert) का निर्माण हुआ है। इसके कारण करीब ढाई हजार की आबादी वाले इस गांव के लोगों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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रोजगार और खेती से कटे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, जोरिया पर पुल निर्माण का मुख्य उद्देश्य गांव को पड़ोसी देवघर जिले (Deoghar District) और सारठ विधानसभा क्षेत्र के दिघी गांव से सीधे जोड़ना था। पुल चालू होने से ग्रामीणों के लिए रोजगार, मजदूरी और व्यापार के सिलसिले में देवघर आना-जाना आसान हो जाता। इसके अलावा, जोरिया के दूसरी तरफ ग्रामीणों की करीब 40 प्रतिशत कृषि भूमि (Agricultural Land) है। पुल के चालू नहीं होने के कारण किसानों को अपनी ही जमीन तक पहुंचने में काफी परेशानी होती है। हैरानी की बात यह है कि एप्रोच रोड और कलवर्ट निर्माण के लिए विभाग के पास 2.60 लाख रुपये (₹2.60 Lakh) की राशि उपलब्ध होने के बावजूद काम अब तक पूरा नहीं किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय सुस्ती और लापरवाही के कारण निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
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हर चौखट पर गुहार, लेकिन हाथ लगी निराशा
लायबनी गांव पूरे जिले में सब्जी उत्पादन (Vegetable Production) के लिए जाना जाता है। गांव की आबादी भी काफी शिक्षित है। इसके बावजूद ग्रामीण आज भी बुनियादी यातायात सुविधा (Transport Facility) से वंचित हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वे स्थानीय विधायक से लेकर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालयों तक कई बार अपनी समस्या लेकर पहुंचे, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायत और गुहार के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन और निराशा ही मिली है।
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पंचायत से लोकसभा चुनाव तक बहिष्कार का ऐलान
प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई (Protest) का फैसला किया है। गांव में करीब 1,000 मतदाता हैं। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि यदि एप्रोच रोड और कलवर्ट का निर्माण जल्द शुरू नहीं कराया गया, तो वे आगामी पंचायत चुनाव (Panchayat Election) के साथ-साथ विधानसभा और लोकसभा चुनाव (Assembly and Lok Sabha Elections) का भी बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि जब तक गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए सड़क और पुलिया का निर्माण नहीं कराया जाता, तब तक वे मतदान (Voting) नहीं करेंगे।