द फॉलोअप डेस्कः
ग्रामीण विकास विभाग के मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम पर ईडी ने पूरी तरह से शिकंजा कस लिया है। 24 फरवरी से वीरेंद्र राम की रिमांड अवधि शुरू हुई है। ईडी पूछताछ के दौरान वीरेंद्र राम से एक-एक कर सारे राज उगलवा रही है। ईडी को पता चला है कि वीरेंद्र राम ने जमशेदपुर स्थित सिंचाई विभाग के बंगले पर अवैध कब्जा बनाए रखा है। इसके लिए उसने एक बड़े अधिकारी को 10 लाख रुपए रिश्वत दिए थे। वीरेंद्र राम का फोन सर्विलांस पर रखा गया था, इस दौरान बंगले पर अवैध कब्जा जमाए रखने के लिए उसने जो भी बातचीत किया था वह सब रिकॉर्ड हो गया है। वीरेंद्र राम ने उस अधिकारी का नाम भी फोन पर लिया था। अब ईडी उस अधिकारी को ढूंढ रही है।

2018 से ही अवैध कब्जा
वीरेंद राम ने फोन पर कहा है कि उसे विभाग से सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस मिला था। लेकिन उसने 10 लाख घूस देकर बात दबा दिया। जिसके बाद बंगला खाली करने के लिे सरकारी कार्यवाई बंद कर दी गई। बातचीत के दौरान उसने उस अधिकारी का नाम भी लिया था अभी उसकी तलाश कर रही है। सिंचाई विभाग का बंगला मुख्य अभियंता चांडिल प्रमंडल को मिलता है। वीरेंद्र राम जब मुख्य अभियंता बने तो यह बंगला उन्हें मिला था। वर्ष 2018 में जल संसाधन विभाग ने वीरेंद्र राम को सिंचाई प्रमंडल के मुख्य अभियंता के पद से हटा दिया। लेकिन उसके बाद भी उस बंगले पर वह कब्ज़ा जमाए रहा। बाद में विभाग के स्तर से उसे बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया। लेकिन पैसे देकर वह मामला दबाते रहा।

सरकार से सारा ब्यौरा मांग
इधर ईडी ने राज्य सरकार से वीरेंद्र राम की संपत्ति, निपटाए गए टेंडर, सरकारी बंगला आवंटन और सर्विस से संबंधित ब्योरा मांगा है। इसके लिए संबंधित विभाग के सचिवों को पत्र लिखा गया है। ईडी यह जानना चाहती है कि वीरेंद्र राम ने अपने कार्यकाल के दौरान का संपत्ति ब्यौरा दिया है या नहीं। अगर उसने राज्य सरकार को ब्यौरा नहीं दिया तो उसकी जांच के लिए ईडी को उपलब्ध कराया जाए। ईडी ने ग्रामीण विकास विभाग, आरईओ और जल संसाधन विभाग को पत्र लिखकर विस्तृत ब्यौरा मांगा है। क्योंकि वह 2018 तक ग्रामीण विकास विभाग के अलावा चांडिल प्रमंडल के भी प्रभार में रहा है।