द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के बहुचर्चित डीजीपी अनुराग गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विश्वस्त सूत्रों ने इसकी पुष्टि कर दी है। हालांकि आधिकारिक रूप से उनके इस्तीफे को अभी मंजूर नहीं किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य सरकार के शीर्ष स्तर पर नये डीजीपी की तलाश भी शुरू कर दी गयी है। क्योंकि अनुराग गुप्ता का इस्तीफा स्वीकार किये जाने के साथ ही राज्य सरकार को नये डीजीपी की नियुक्ति अनिवार्य हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार अनुराग गुप्ता ने कल शाम मुख्यमंत्री आवास जाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। उसके बाद सरकार के शीर्ष स्तर पर सरगर्मी काफी बढ़ गयी।
जानकारी के अनुसार कल अनुराग गुप्ता द्वारा इस्तीफा देने के बाद आज उन्हें सीएमओ बुलाया गया था। लेकिन सुबह उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हुई बतायी गयी। फिलहाल मुख्यमंत्री लुगु बुरु में आयोजित घांटा बाड़ी धोरोम गाढ़ में आयोजित राजकीय महोत्सव में हैं। मुख्यमंत्री के शाम रांची पहुंचने के बाद डीजीपी के मामले में अंतिम फैसला लिए जाने की संभावना है। यहां मालूम हो कि पिछले दो महीने से ही अनुराग गुप्ता को लेकर सरकार के शीर्ष स्तर पर चर्चा शुरू हो गयी थी। जब से उनका एसीबी और सीआईडी का प्रभार सरकार ने ले लिया था, उसी समय से उनका सरकार के साथ संबंध बेहतर नहीं बताया जाने लगा था।

एमएस भाटिया और प्रशांत सिंह नये डीजीपी के रेस में
इधर आधिकारिक सूत्रों के अनुसार डीजी रैंक के अधिकारी एमएस भाटिया और प्रशांत सिंह नये डीजीपी के रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इनमें एमएस भाटिया का नाम ऊपर है।
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लगातार विवाद में आ रहे थे अनुराग गुप्ता
डीजीपी बनने के बाद से ही अनुराग गुप्ता लगातार विवाद में आ रहे थे। उन्हें 2022 में डीजी रैंक में प्रोन्नति मिली थी। फिर उन्हें जुलाई 2024 में झारखंड का डीजीपी नियुक्त किया गया था। निर्वाचन आयोग के आदेश के आलोक में 2024 में हुए विधानसभा चुनाव से पूर्व उन्हें डीजीपी पद से हटा कर अजय कुमार सिंह को डीजीपी बनाया गया। लेकिन हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद फिर से उन्हें डीजीपी बना दिया गया। लेकिन विवाद फिर खत्म नहीं हुआ। केंद्र सरकार ने उनकी डीजीपी पद पर नियुक्ति को गलत करार दिया। महालेखाकार ने उनका वेतन पूर्जा निर्गत करना बंद कर दिया। मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, जहां अभी भी उनकी डीजीपी पद पर नियुक्ति का मामला विचाराधीन है। हालांकि महालेखाकार ने उनका वेतन पूर्जा इस शर्त के साथ फिर जारी कर दिया कि न्यायालय के आदेश से यह प्रभावित होगा। यहां मालूम हो कि तीन फरवरी 2027 को डीजीपी के पद पर नियमित नियुक्ति होने के बाद से उनका कार्यकाल दो फरवरी 2027 तक था। अगर अदालत का कोई निगेटिव फैसला नहीं आता।
